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Showing posts from August, 2019

लग रही है

बहुत है आग जो दिल में पली से लग रही है, तहत उसके मुझे दुनिया जली सी लग रही है, अभी काली घटा में एक बिजली जोर से चमकी, सहर और शाम आपस में मिली सी लग रही है, किसी बेवा के दिल सी धंस के नी...

नूर ले आए

सिसकती हसरतों के दाग़ कितनी दूर ले आये, रहीं मजबूरियां तारी खुदी से दूर ले आये, उजालों की हक़ीक़त से ज़माना ख़ूब वाकिफ है, लो अब हमने जलाया दिल हवा में नूर ले आये उर्मिला माधव

रखते हैं

अहले ग़म हैं,पर्दा दारी रखते हैं, मर जाने की सब तैयारी रखते हैं, ग़ालिब हो जाना ही ऊंची बात नहीं, अपनी दम पर हम ख़ुद्दारी रखते हैं, कोई रहबरी नहीं चाहिए दुनियां की, शख़्स कोई हो दूर क...

ज़र्फ़

मेरी इन ख़ामोशियों के ज़र्फ़ को मत तौलिए, आपको अपने लिए शर्मिन्दगी हो जाएगी... आपने जितना किया है,उतना मैं भी कर चलूँ, वरना मेरे नाम कुल ,आवारगी हो जाएगी.. ****** Meri in khamoshiyon ke zarf ko mat takiye, Aapko apne liye,sharmindagi ho jaegii...... Aapne jitna kiya hai,utna main bhi kar chalun, Warna mer...

दिखलाया है

अब तक मुझको ये अंदाज़ा लग पाया है, किसने मुझको झूठा नक्शा दिखलाया है, ज़ह्र के चश्मे ख़ास हवा में मिल जाते है, बैसाखी से कोई कहाँ तक चल पाया है? तय रहता है चार क़दम पर ठोकर खाना, गिरने...

कासा नहीं रखती

ज़रूरतमंद हूँ लेकिन कोई कासा नही रखती, इरादा जो भी रखती हूं कभी आधा नहीं रखती, मेरी आवाज़ का हिस्सा फ़लक तक भी पहुंचता है, जो कहती हूँ बुलंदी से,ज़ुबाँ सादा नहीं रखती, मेरे खूँ में ...

कासा नहीं रखती

ज़रूरतमंद हूँ लेकिन कोई कासा नही रखती, इरादा जो भी रखती हूं कभी आधा नहीं रखती, मेरी आवाज़ का हिस्सा फ़लक तक भी पहुंचता है, जो कहती हूँ बुलंदी से,ज़ुबाँ सादा नहीं रखती, मेरे खूँ में ...

कामयाबी है

मुहब्बत को इशारों में समझना कामयाबी है, ये मौके की नज़ाक़त है तो हां में हां मिला दी है, किसीउम्मीद का जज़्बा,हदों के पार जा पहुंचा, वो कबका जा चुका है,कब कहाँ उसने सदा दी है उर्मि...

और क्या

फ़ालतू की है मशक़्क़त और क्या, बे-सबब ही है मुसीबत और क्या, वुसअतें सब छोड़ कर जाना ही है, है यही इसकी हक़ीक़त और क्या, उर्मिला माधव 30.8.2019

कहले आके

पुराने पन्नों से----!! ------------------!! हमें किसीसे गिला ही क्यूँ हो ?? जिसे जो कहना हो कहले आके, के जिस चलन से निबाहीं हमने, कभी तो कोई यूँ सहले आके, जिसे हो दावा बुलन्दियों का, कटा ले गरदन वो पहले...

और हम

ये हमारी ज़िन्दगानी और हम, उम्र भर ही नातवानी और हम, हम अकेले और इतने !!मरहले, रोज़ इक बनती कहानी और हम, वक़्त लाया बाम पर हम आगये, उफ़ हमारी बे-ज़बानी और हम, बे-अदब जुमले निशाने साध कर, शो...

अधूरा लगता है

मेरी एक बहुत पसंदीदा रचना... सखियाँ कहतीं,साजन के बिन प्यार अधूरा लगता है, अम्मां कहतीं काजल बिन....सिंगार अधूरा लगता है, चाहे जितनी बिजली चमके,घर की सभी मुंडेरों पर, बिन बरखा के ...

देखा किये

फानी बदायूँनी सा'ब की ज़मीन पर--/ हम बहुत मजबूर होकर दर-ब-दर देखा किये, जाने वाले राह तेरी उम्र भर देखा किये देखते ही देखते हर रंग किस्मत ले उड़ी, कुछ नहीं था फिर भी जाने क्या उधर देख...

दायरे

खुद मुक़म्मल कर लिए जब दायरे, ज़ख्म दिल के बे-सबब दिखलाये रे, मुतमईन होकर किया हर फैसला, काहेको फिर मन ये अब घबराए रे, इक गुज़ारिश है मेरी लिल्लाह सुन कोई तो जीने का ढब सिखलाये रे, उ...

लिख्खा हुआ

गुफ्तगू के दरमियां कल इक अजब किस्सा हुआ, नींव का पथ्थर लगा हमको बहुत खिसका  हुआ, कशमकश में घूमते हम रह गए दीवानावार, रात भर हमने समेटा जब यकीं बिखरा हुआ, ज़िन्दगी भर के तजुरबे ह...

पास रखा

हमने अंदाज़ अपना ख़ास रखा, दिल सरे शाम से उदास रखा, ये मेरा दिल ऑ ग़ैर की महफ़िल, दिल बहुत दर्द से हस्सास रखा, दुश्मनी खुद से हमने कर डाली, याद को उसकी अपने पास रखा, #उरमिलामधव.. 28.8.2015...

मेरी कहानी

जनवरी की सर्द रातें और वो गंगा का पानी, बस वहीँ पर चीख कर चुप हो गई मेरी कहानी, मैं तो उसको रोकती ही रह गई,हर ग़ाम पर, क्या करूँ पर ज़िंदग़ी ने बात मेरी इक न मानी, किसने पाया है सिला अच...

देखा किये

हम बहुत मजबूर होकर दर-ब-दर देखा किये, मरने वाले राह तेरी उम्र भर देखा किये देखते ही देखते हर रंग किस्मत ले उड़ी, दिल बुझा जाता था लेकिन फिर उधर देखा किये । है अजब सी दास्ताँ पर सच ...

सौदा करूँ

किसलिए जज़्बात का सौदा करूँ, झूठ से भी कब तलक बहला करूँ, जो मेरी बुनियाद का हिस्सा नही, उसपे नीयत किस लिए ज़ाया करूँ, यूँ भी तो तनहा है हर इक आदमी, बे-सबब ही इतना क्यूँ सोचा करूँ, कौ...

दिया बढ़ा दे

दिया बढ़ा दे, सोना है, जलने दो माँ, अंधेरा अच्छा नहीं लगता, तेल बढ़ा दूँ क्या ? जलता रहेगा, अंधेरे की आख़री सांस तक, और तूफ़ान, बरसाती हवाएं धोबी की टीन की छत उस पर पानी के गिरने की आवा...

चाय और सुबह

आज फिर एक और सुबह, ये तुम्हारी ख़ाली कुर्सी, बनवा देती है कभी तुम्हारे हिस्से की चाय, मैं इसके साथ पीती हूँ अपने हिस्से की चाय, एक चाय यूँ ही रखी रह जाती है जानते हो मैं भी अब थकती ...

दायरे

खुद मुक़म्मल कर लिए जब दायरे, ज़ख्म दिल के बे-सबब दिखलाये रे, मुतमईन होकर किया हर फैसला, काहेको फिर मन ये अब घबराए रे, इक गुज़ारिश है मेरी लिल्लाह सुन कोई तो जीने का ढब सिखलाये रे, उ...

देखा बहुत

रात हमने आईना देखा बहुत, और तब अपने तईं सोचा बहुत, इस क़दर हावी हुईं कमज़ोरियाँ ? अपने जी पै तीर,ख़ुद साधा बहुत? पाँव पर है धूप,सर पर आफ़ताब, दिल अबस ही शबनमी,भीगा बहुत, रफ़्ता-रफ़्ता रा...

ज़ाया करूँ

किसलिए जज़्बात का सौदा करूँ, झूठ से भी कब तलक बहला करूँ, जो मेरी बुनियाद का हिस्सा नही, उसपे नीयत किस लिए ज़ाया करूँ, यूँ भी तो तनहा है हर इक आदमी, बे-सबब ही इतना क्यूँ सोचा करूँ, कौ...

चलता रहा

उसके दिल में ख़ामख़्वा ही सिलसिला,चलता रहा, मेरी ख़ामोशी से उसको,हर सिला मिलता रहा.. दिल की ये संजीदगी, और उसका वो आवारापन मेरा उसका राबिता इक शाम सा ढलता रहा, उर्मिला माधव, 25.8.2017

नहीं है

मुहब्बत किसीसे अगर हो ही जाए , वो बस हादसा है नियामत नहीं है , जो दिल आगया ग़र तुम्हारा किसीपे , तो फिर एक दिन भी सलामत नहीं है , अभी तक तो एक घर भी ऐसा न देखा , जहां दिल पे लानत मलामत नह...

गाँव को जाती

होते पंख अगर जो मुझको उड़कर उनके गाँव को जाती, तब अमरूदों की बगिया मैं छुप कर कहीं बैठ तो पाती, कोई हवा कहीं जो चलती तन मन उनका छू कर आती, उनकी साँसों के चन्दन से मेरा तन-मन भी महका...

सुन रहे हो ना?

तुम सुन रहे हो ना ? क्या कहना है मुझे ? तुम मेरी सांसों के दायरे में क़ैद हो, इसलिए तुम्हारे पास होने वाली हर एक आहट, ख़ुद अपनी ख़बर देती है, चूँकि कई जन्मों से तुम मेरे हो, मैंने तुम्...

रब ही होगा

आप कहते हैं अगर सच है, तो सच ही होगा, सबका लजपाल फ़क़त रब है तो रब ही होगा, लोग कहते हैं ....मेरा क़त्ल सरे महफ़िल हो उसपै होना है अगर अब तो ये अब ही होगा, उर्मिला माधव.. 25.8.2016

नहीं बन पाती

क्या करें बात अगर बात नहीं बन पाती, ज़ाती जज़्बे के लिए रात नहीं बन पाती, चश्मे पुरनम थी,ऑ रात थी,सैलाब कई, अपने हाथों कोई बरसात नहीं बन पाती, रोज़ मरते हैं यहाँ ..आहो फुगां वाले भी, म...

किधर का है

एक मतला दो शेर----- सब  तमाशा ये...उम्र भर का है, ये ही किस्सा हर एक घर का है, आज तक भी ये राज़ लगता है, बाद मरने के...ये किधर का है ? मेरे जगते ही......रूह जग जाए, मुन्तजिर दिल उसी सहर का है उर्मिल...

ख़ातून दिल्ली की

लो मेरी दास्तां सुन लो मैं हूँ ख़ातून दिल्ली की, हिली जाती है अब बुनियाद,अफ़लातून दिल्ली की, नहीं महफूज़ अस्मत है,के दिल में ख़ास दहशत है, क़दम बाहर निकालूँ जो तो बस अंजाम वहशत है, स...

वक़्त होना चाहिए

चोट खाने के लिए दिल सख्त होना चाहिए, ख़ुद संभलने के लिए कुछ वक़्त होना चाहिए, बात ग़र कहनी रहे तो हौसला रख्खें ज़रूर, हक़ बुलंदी के लिए बस ख़ब्त होना चाहिए, एक दिन का काम तो ये है नहीं स...

किधर जाएंगे

दामन-ए-दश्त से बाहर क्या निकल पाएंगे, बात इतनी सी है क्या फिर न इधर आएंगे? आते-जाते हुए लोगों को यहाँ देखा बहुत, सोचती हूँ के यहाँ आ के किधर जाएंगे? रूह-ए-ज़िंदान तो रह-रह के सदा देत...

पहला प्रयास

पहला प्रयासहै इस तरह कहने का ================== क्या कहा ?? चुप रहूँ क्यूँ आखिर ?? शब्द तो बोलने को होते हैं जितने भी गीत हैं कहानी हैं , शब्द के जाल हैं, इनमें भाव भी हैं, कोई कहता है कोई सुनता है, ...

समझा किये

लोग ख़ुद को ही हमेशा,नाख़ुदा समझा किये, दूसरों को शायरों से अलहदा समझा किये, ग़र बड़ी मछली दिखाई दे गई तो वाह ख़ूब, बाकी सारी मछलियों को बस ग़दा समझा किये, मछलियाँ कमसिन अगर हैं,बात द...

मत रखना

किसीको .घर बुलाना हो, कोई ..रिश्ता निभाना हो, क़दम दिल में जमाना हो, तो दिल में पेच मत रखना.. उर्मिला माधव.. 21.8.2017

याद आता है

कड़े फिकरे कोई कह कर, चला जाता था जो अक्सर, तग़ाफ़ुल उसकी नज़रों में, कभी देखा था जो मैंने, वो मुझको याद आता है।। ज़मीं जब ज़ख़्म धोती थी, फ़लक़ रह-रह के रोता था , कहीं तन्हाई में जाकर, कोई दा...

उसूल होगई

इक ज़रा सी भूल हो गई, ज़िन्दगी ही धूल हो गई, फूल सारे झड़ के गिर गए, शाख़-ए-गुल ही शूल हो गई, मश्क़ हमने बे पनाह की, हर नफ़स फ़िज़ूल हो गई, द्वार घर के बंद कर लिए, जब ख़ला उसूल हो गई, हादिसे का रंग ...

दुहाई है

वक़्त ने भी वो अदा दिखलाई है,दुहाई है, मेरे हिस्से मैं फ़क़त  रुसवाई है दुहाई है, चाँद भी मेरी तरह तनहाई मैं डूबा लगा, किसने फिर ये चांदनी फैलाई है दुहाई है, जिसकी खातिर मुन्तजिर ...

देख ले

आजकल बादल बरसते ही कहाँ हैं, सब्र कर कुछ और चल कर देख ले, जो नहीं तुझको यकीं तो यूं भी कर, अपने क़दमों पर उछल कर देख ले ऐसे मौसम मैं हवा किस रंग मैं है, ज़िद है तो बाहर निकल कर देख ले, उर...

अच्छा नहीं था

फ़ालतू बातों में कुछ रख्खा नहीं था, आप जो कहते थे वो अच्छा नहीं था, तंज,दूरी और फ़क़त लानत,मलामत, एक मुहब्बत के अलावा क्या नहीं था ? कितनी ज़्यादः कोशिशें कीं सीखने की, क्या करें हमक...

हाल से

तुम याद आ रहे हो मुझे कितने साल से, वाकिफ़ कराऊँ कैसे मगर अपने हाल से, तक़दीर में लिखा है फ़क़त मुन्तज़िर रहूं दिन गिन रही हूँ शाम सहर बस मलाल से, उर्मिला माधव

रख्खे रहे

मुश्किलों के साथ यूँ चलते रहे, ख़्वाब सारे, ताक़ पे रख्खे रहे, आंख मूंदी और बढ़े आंधी में हम, राह के पथ्थर,......मना करते रहे... उर्मिला माधव, 20.8.2017

मत बोलना

जो भी दिल में आये वो मत बोलना, बे-सबब ही कुफ़्र कुछ मत तोलना, किसके दिल में जाने कितनी आग है, इसलिए दिल हर जगह मत खोलना, ज़ह्र से ही दिल भरा हो क्या खबर, मीठी-मीठी बात पर मत डोलना, हो त-आ...

क़ुतुबमीनार हो

एक मतला तीन शेर---- मिलकियत जब ग़ैर की हो,दूर से दीदार हो, चाहे वो फिर ताज हो या के क़ुतुब मीनार हो, दस क़दम हटके चलो जलते हुए से तूर से, जल गए तो उम्र भर बोलेंगे सब,बीमार हो?? दूर रहना जोख...

बदतर हो गए

Jul 26, 2016 9:46am Waqt or halaat kitne bad se badtar ho gaye, Qatilaanaa haadse hii rang-e-manzar ho gaye, Main tumhin se poochhti hun ai zamin-o-aasmaaN, Kaun hain wo jinke sab ahsaas patthar ho gaye, Sochtii hun aadmi kii zaat ko kya ho gayaa, Khoon men duube hue sab teer-o-khanjar ho gaye, koi bhi baaqi nahin ab aurten,bachche jawaan, Dard chiikheN or aansu ye hii ghar-ghar ho gaye, Dast andaazi ki himmat jis kisiine ki wahaaN Sab buridah sar hue or zer-e-nashtar ho gaye, Urmila Madhav... 26.7.2016

अफ़साना---ज़िंदादिल

ज़िंदादिल.... उस्ताद प्रोफेसर..मुजतबा हुसैन, महफ़िलों के ग़ुरूर का बाइस,अदब की दुनियां के नामी गरामी शायर, oxford यूनिवर्सिटी में ज़बान के प्रोफ़ेसर,( professor de lingua) आगरा के बाशिंदे थे,इतने ख़ूबसूर...