रखते हैं
अहले ग़म हैं,पर्दा दारी रखते हैं,
मर जाने की सब तैयारी रखते हैं,
ग़ालिब हो जाना ही ऊंची बात नहीं,
अपनी दम पर हम ख़ुद्दारी रखते हैं,
कोई रहबरी नहीं चाहिए दुनियां की,
शख़्स कोई हो दूर की यारी रखते हैं,
आज मुहब्बत लफ़्फ़ाज़ी का नाम हुआ,
बेमतलब की सब बीमारी रखते हैं,
बचते हैं हम कान बुरीदह लोगों से,
सब दामन में तीर कटारी रखते हैं,
उर्मिला माधव
1.9.2017
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