पहला प्रयास
पहला प्रयासहै इस तरह कहने का
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क्या कहा ??
चुप रहूँ
क्यूँ आखिर ??
शब्द तो बोलने को होते हैं
जितने भी गीत हैं
कहानी हैं ,
शब्द के जाल हैं,
इनमें भाव भी हैं,
कोई कहता है
कोई सुनता है,
अर्थ भी टटोलने को होते हैं,
कह दिया सुन लिया ,
पर कहाँ ख़तम हुआ??
भाव बस तोलने को होते हैं
उर्मिला माधव ...
२१.८.२०१३
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