क़ुतुबमीनार हो
एक मतला तीन शेर----
मिलकियत जब ग़ैर की हो,दूर से दीदार हो,
चाहे वो फिर ताज हो या के क़ुतुब मीनार हो,
दस क़दम हटके चलो जलते हुए से तूर से,
जल गए तो उम्र भर बोलेंगे सब,बीमार हो??
दूर रहना जोखिमों से,लोग ये कह देंगे तब,
किस लिए आख़िर बताओ,ज़ीस्त से बेज़ार हो,
ज़िन्दगी हमने गुज़ारी,बस इसी अंदाज़ से,
गम नहीं करते ज़रा भी जीत हो के हार हो,
उर्मिला माधव...
19.8.2014...
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