मेरी कहानी
जनवरी की सर्द रातें और वो गंगा का पानी,
बस वहीँ पर चीख कर चुप हो गई मेरी कहानी,
मैं तो उसको रोकती ही रह गई,हर ग़ाम पर,
क्या करूँ पर ज़िंदग़ी ने बात मेरी इक न मानी,
किसने पाया है सिला अच्छाइयों का आज तक,
क्यों अबस इंसान बन कर झोंक दी अपनी जवानी,
उर्मिला माधव..
28.8.2016
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