किधर का है

एक मतला दो शेर-----
सब  तमाशा ये...उम्र भर का है,
ये ही किस्सा हर एक घर का है,

आज तक भी ये राज़ लगता है,
बाद मरने के...ये किधर का है ?

मेरे जगते ही......रूह जग जाए,
मुन्तजिर दिल उसी सहर का है
उर्मिला माधव...
22.8.2018

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