मत बोलना
जो भी दिल में आये वो मत बोलना,
बे-सबब ही कुफ़्र कुछ मत तोलना,
किसके दिल में जाने कितनी आग है,
इसलिए दिल हर जगह मत खोलना,
ज़ह्र से ही दिल भरा हो क्या खबर,
मीठी-मीठी बात पर मत डोलना,
हो त-आल्लुक़ तर्क इसका ग़म नहीं,
दुश्मनों में दोस्ती मत घोलना,
क्या है अच्छा,क्या बुरा ये सोचकर,
तुम मुक़द्दस रूह को मत झोलना.....
उर्मिला माधव...
19.82014...
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