सुन रहे हो ना?
तुम सुन रहे हो ना ?
क्या कहना है मुझे ?
तुम मेरी सांसों के दायरे में क़ैद हो,
इसलिए तुम्हारे पास होने वाली हर एक आहट,
ख़ुद अपनी ख़बर देती है,
चूँकि कई जन्मों से तुम मेरे हो,
मैंने तुम्हें कभी रोका नहीं,
जो भी होता है तुम्हारे चारों तरफ
उसको मेरी ख़ामोशी देखती है
मैंने तुम्हें कभी रोका नहीं
कभी रोकूँगी भी नहीं,
सब कुछ गुज़र जाने दूंगी,
अपने हिस्से बीन कर चली जाउंगी,
और फिर कभी नहीं आउंगी,
तुमको मेरी खामोश आँखें नहीं देखेंगी
एहसास कभी नहीं मरते,
वो किसी मुश्किल से नहीं डरते
मैं तुम्हे बाँट नहीं सकती,
जितने भी हो जहाँ तक भी हो,
मेरे हो,मेरे एहसास बताते हैं मुझे,
तुम्हारे एहसास ज़िंदा हैं वो मुझे
कैसे देख पाएंगे टूटते हुए,
कैसे देख पाएंगे तुमसे रूठते हुए,
मेरी हिम्मत बहुत कमज़ोर हो गई है
कितनी बिलख कर रो गई है,
घनघोर बरसात की रात,
मेरे मन का अवसाद जाना ही नहीं
तुमने मेरा मौन संवाद पहचाना ही नहीं
तो मेरा मौन रह जाना ही ठीक था
थक गई थी मैं मन का बोझ ढोते हुए,
नींद आँखों से बिछड़ना ही चाहती थी
और मैं बस शून्य में ताकती थी
तुमने पूछा नहीं मैंने बताया नहीं,
और बताती भी क्या कुछ अनकहा सा
रह गया था कुछ ऐसा जो तुम्हारा
दिल सिर्फ तुम्हारा ही दिल जानता था
और अब तुम अजाने नहीं।हो।।।
सिर्फ़ तुम्हारी भूमिका रह गई है
उर्मिला माधव
25.8.2015
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