लाख़ आगे से गुज़र जाए,संवर के दुनियां, मेरी आँखों को नज़र आए बिखर के दुनियां, बस तमाशा ही हुआ करता है अब ज़ेरे नज़र, सूरत-ए-हाल कहूँ,डर जाए,सिहर के दुनियां,उर्मिला माधव
मन स्पंदन हीन हो गया, जैसे आत्म विहीन होगया, आंसू हों या मुक्त हंसी पर, स्थित प्रज्ञ,ये दीन हो गया, ह्रदय प्रीत के मान दंड पर, पानी के बिच मीन हो गया, सत्य कहें तो प्रेम बिंदु पर, य...
दायरे, महदूद हों या मसदूद क्या फ़र्क़ है अगर दिल ही न चाहे बढ़ना सोच कहीं खुश्क हो गया तो क्या हो शबनम से बहुत होगा तो दरख़्तों की शाखें गीली होंगी पत्ते भीग जाएंगे फूल भीग जायें...
बुरी हो या अच्छी,लड़कपन की दुनियां, बहोत याद आती है,बचपन की दुनियां, वो खड़िया से आँगन में ख़ाने बनाना, ऑ गिट्टी से उस पर निशाने लगाना, बस एक पाँव से ही मगर चलके जाना, कभी जीत जाना,कभ...
ढोलक की थाप, सोहर गाने की आवाज़, किन्नरों के समूह का नृत्य, पर थाप से उठती हुई उदासी की परछाइयां, देख सकती हूं मैं,दूर तक, क्या है ये? हतप्रभ होता हुआ मन, ढोलक की आवाज़ में नीरवता क...
ऐसा नहीं के हमको .....बता कर दिए गए, देना था कुछ सो ग़म ही अता कर दिए गए, बरसों से आंसुओं से जिन्हें लिख रहे थे हम, वो ख़त मुग़ालते में ख़ता कर दिए गए, हैरत न हमको कुछ भी हुई ख़ाक देख कर, रंजो अ...
याद बहुत ही आने वाला, ना जाने क्या करता होगा, नौ बज कर सैंतालिस तक तो मैंने उसको जगते देखा, उससे ज़्यादा जगने पर फिर, घर वालों से डरता होगा.. क्या-क्या करता होगा घर में शायद पढ़ता-ल...
हम तो कुछ देर और बैठेंगे, आप महफ़िल उठाके लेजाएँ, हम तो अशआर नज़्र करते हैं आप बस दिल बचाके ले जाएं हम तो राही हैं उम्र भर वाले, आप मंज़िल हटा के ले जाएँ अब सफ़ीने के पांव जमने लगे, आप ...
एक ताबूत और सिरहाने दो, जैसे जी चाहे लेट जाने दो, इक सुपुर्द-ए-ज़मीं ही बाक़ी है, दफ़्न इक रस्म है, निभाने दो, मौत बस आख़री तमाशा है, इसको इज़्ज़त से रंग लाने दो, इसको मरके मिसाल होना है, ज़...
तुम ही हो मन मीत हमारे, याद करें हम सांझ सकारे, जंगल वृक्ष नदी के धारे, अर्थ हीन लगते हैं..सारे, है सौगंध...हमारी प्रियवर, सम्मुख आओ आज हमारे... उर्मिला माधव .. २८.९.२०१३
खून के रिश्ते जो मेरे नाम थे, ज़िन्दगी के वास्ते इल्ज़ाम थे, हक़ अदा करते रहे रुसवाई का, अश्क़ मेरे जा-ब-जा बदनाम थे, फासलों की बढ़ गयी रस्सा-कशी, जो तग़ाफ़ुल का लिए पैग़ाम थे, था मुहब्बत ...
इम्तिहाँ है ज़िन्दगी तो जो हुआ अच्छा हुआ, ये ही तो बेचारगी है,वक़्त कब किसका हुआ? टूटना दिल का हुआ मंज़ूर जब हर हाल में, रंज क्या करना भले झूठा हुआ सच्चा हुआ, #उर्मिलामाधव... 26.9.2015
दो क़दम चलना है मुश्किल,इस क़दर पुर ख़ार हूँ, ये बता दे ज़िन्दगी क्या मैं बहुत दुश्वार हूँ ? क्या करूँ होता नहीं हरगिज़ ज़माने से निबाह अपनी ज़ाती ज़िद को लेकर मैं बख़ुद बेज़ार हूँ, अपने ...
ऐसा नहीं के हमको .....बता कर दिए गए, देना था कुछ सो ग़म ही अता कर दिए गए, बरसों से आंसुओं से जिन्हें लिख रहे थे हम, वो ख़त मुग़ालते में ख़ता कर दिए गए, हैरत न हमको कुछ भी हुई ख़ाक देख कर, रंजो अ...
अपनी ख़ुद्दारी के दम पर जी रहे हैं, इस लिए हम ज़ह्र लाखों पी रहे हैं, बारहा होते मुख़ातिब ज़ख्म अक्सर, हम मुसलसल साथ इसके ही रहे हैं. ये अनादारी है आदत के मुताबिक, हम न ज़ाती रंग में तर...
जब तूने दिल तोड़ा होगा, कैसे तुझको छोड़ा होगा, तनहाई में अक्सर जाकर, चौखट पै सर फोड़ा होगा, बाँयां हाथ जिगर पै रखकर, दिल का दर्द निचोड़ा होगा, चाहे जितना ग़म हो तुझको, मुझ से तो पर थोड़...
अंधेरी रात में जलते हुए चराग़ों को, नज़र से देखना और देर तक खड़े रहना, ज़ेहन में अपनी नदामत का एक अंधेरा है, जहां ने हमको बड़ी ख़ूबियों से घेरा है, इसी के साथ बड़ी मुद्दतों से चलते हैं, ह...
उसके इनकार या इक़रार की क़ीमत क्या है, दिल से संजीदा नहीं,प्यार की क़ीमत क्या है, बिल शुबह झूठ के कुछ ख़ास कसीदे भेजे, ऐसे मतलब से बने यार की क़ीमत क्या है, जिसकी बुनियाद रखी, तुमने मह...
रहेगी आज़्म्तर से आज़्म्तर ये आखरी कोशिश, तुझे सुननी पड़ेगी बे-खबर ये आखरी कोशिश, कभी तो कुछ असर होगा मेरी खामोश आहों का, नज़र अंदाज़ होगी किस क़दर ये आखरी कोशिश, ज़रा दामन बढ़ा चश्म-ए-...
आंसुओं के साथ मैने,ज़िंदग़ी गुज़ार दी, वक़्त की बला उतारी,सोज़े-ए-ग़म पै वार दी, बेबसी ऑ बेकसी में बेख़ुदी का आसरा, जब हुई ज़ियादती तो मग्ज़ से उतार दी.. किसलिए क़ुबूल हों दह्र तेरी नेमतें, ...
आओ..!! सब्र लाए हो ? माद्दा लाए हो? बर्दाश्त का, जानते हो, ? ताली बजाना, हैरतअंगेज़ी नहीं आनी है, चेहरे पर, नहीं कहना है, Weird, अंग्रेज़ी या हिंदी किसी भी ज़बान में, ख़ामोश आंखें, ख़ामोश लब, ख़ाम...
मुहब्बत हुई तो बुरा हो गया क्या? जफ़ाओं से दिल आशना हो गया क्या ? बहोत जिसकी तुम पैरवी कर रहे थे, वो माशूक़ तुम से जुदा हो गया क्या ? ज़मीं पर कभी पाँव,रखते न थे तुम, वो अंदाज़ बिल्कुल ह...
Raat bhi hai bebhaya jati nahi hai Sahar kitni be wafa aati nahin hai Urmila madhav... रात कैसी बे-हया जाती नहीं, सहर कितनी बे-वफ़ा आती नहीं, उर्मिला माधव
आग ग़ैरों ने लगाई बोलो इसका क्या करें, हार कर बैठें के या फिर हौसला ज़िंदा करें, कोई भी इस ज़िन्दगी में साथ तो देता नहीं, ख़ुद-ब-ख़ुद उठ जाएँ ख़ुद ही रास्ता पूरा करें, ज़िन्दगी कुछ भी नह...
जब कभी पिछले रिसाले देखना, हंसने वालों के भी छाले देखना, मुस्कुराहट पर फ़क़त जाना नहीं, हो सके तो आह-ओ-नाले देखना, महफ़िलों औ-क़ह्क़हों के शोर में, आंसुओं वाले......निवाले देखना, कुछ फ़स...
जंगली, जंजाल देखो, मकड़ियों के, जाल देखो, आदमी का, हाल देखो, लड़कियों के नाम पर, रोज़ इक वबाल देखो, इज़्ज़तों पे क़ाबिज़ हैं, माईयों के लाल देखो, उफ़ अगर जो करनी है, गर्दनें हलाल देखो, हक़ जो ...
जब खुदा ने दहर बनाया था, मेरे हिस्से में तू ही आया था, तेरी जो उम्र एक अमानत थी, वक़्त ने उसको लूट खाया था, मेरी उम्मीद यूँ ही क़ायम थी, गो कि हर रोज़ घर सजाया था, शाम ढलने को जब भी होती थ...
गैर के दिल पै हंसने वाले,अपना दिल सहला कर देख, उसमें भी कुछ दाग़ तो होंगे,थोड़ा अन्दर जा कर देख, मिली-जुली कुछ हसरत होंगी,थोड़ी हलकी थोड़ी भारी, खूबी क्या है ,ख़ामी क्या है,खुद अंदाज़ ल...
1 :: ये तो ज़ाहिर है,वो बिलकुल बे-वफ़ा है, क्या कहूँ दिल का अलहदा फ़लसफ़ा है, क्यूँ किसी इन्सान का शिकवा करूँ मैं, गम मेरी तक़दीर का अव्वल सफ्हा है, बारहा तन्हाइयां हैं,बारहा वीरां सफ़र ...
क्या कहूँ जुस्तजू को लिए सो गई, चांदनी उससे पहले ही गुम हो गई, यक़-ब-यक़ शोर काली घटा ने किया, गो कि परछाईं जाने कहाँ खो गई, गाहे-गाहे कड़कने लगीं बिजलियाँ, दिल धड़कने लगा ज़ोर से रो गई, ...
छोटी सी दास्ताँ है कहदो तो में सुनाऊं??! ग़र जो मुलाहिज़ा हो,आगे इसे बढाऊं??...! छोटी से एक बच्ची पैदा हुई ज़मीं पर, हर सम्त तीरगी थी,न रौशनी कहीं पर, बूढ़े पडोसी आये बोले कि क्या हुआ है?? र...
सामने हो भी और नहीं भी हो, ये जो घेरे तुम्हारी यादों के, किस तरह घेर कर खड़े हैं सब, इतने ज़िद्दी हैं घर नहीं जाते, नींद कहती है हम नहीं आते, रात है,तीरगी है,तन्हाई, और क्या-क्या लिखा ...
डूबते सूरज की समझे नातवानी तो मैं जानूँ, और अपनी छोड़ दे ये हुक्मरानी तो मैं जानूँ बादशाहत के नशे में चल रहा है झूम कर तू, बिन नशे के जी ज़रा ये ज़िंदगानी तो मैं जानूँ, हो गए गद्दीन...
एक मुद्दत से .....मेरे पीछे पड़ा है, दर्द है के हर जगह आकर खड़ा है... रास्ते कुछ और भी हैं ...दुश्मनी के, ये बता तू किसलिए जिद पर अड़ा है? उर्मिला माधव... 16 .9.2015
मैं अपनी राह खुद चल पाऊं इतनी रौशनी तो हो, हवा के साथ उड़ जाऊँ हवा में ज़िन्दगी तो हो, मिलाने हाथ आए हो, चलो,मंज़ूर भी कर लूँ , मगर दिल में तुम्हारे सादगी सी सादगी तो हो, उर्मिला माधव
आपको आंखों की तुग़यानी नज़र आती है क्या ? बेवज्ह भी यूँ किसीकी आंख भर आती है क्या ? हम तो हैं अनजान ये सब आप ही बतलाइये आह की तह में ख़ुशी की हद भी दर आती है क्या ? मेरे सर की सरपरस्ती, स...
एक मतला दो शेर... ज़ख्म यूँ दिल के संभाले जायेंगे, कितने हैं गहरे खंगाले जायेंगे, चाहे जो हालात हों लेकिन सुनो, हर तरह से हल निकाले जायेंगे, ग़र ज़बां देदी तो बस देदी मियाँ, हम जुनूं...