स्पंदन हीन हो गया
मन स्पंदन हीन हो गया,
जैसे आत्म विहीन होगया,
आंसू हों या मुक्त हंसी पर,
स्थित प्रज्ञ,ये दीन हो गया,
ह्रदय प्रीत के मान दंड पर,
पानी के बिच मीन हो गया,
सत्य कहें तो प्रेम बिंदु पर,
ये बिलकुल गतिहीन हो गया,
जीवन के आवश्यक तल पर,
आर्तनाद .....आसीन होगया
#उर्मिलामाधव...
30.9.2015
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