क्या करें
आग ग़ैरों ने लगाई बोलो इसका क्या करें,
हार कर बैठें के या फिर हौसला ज़िंदा करें,
कोई भी इस ज़िन्दगी में साथ तो देता नहीं,
ख़ुद-ब-ख़ुद उठ जाएँ ख़ुद ही रास्ता पूरा करें,
ज़िन्दगी कुछ भी नहीं है एक सिवाए हादसा,
फिर भी इन हालात से कुछ खूबियां पैदा करें,
पाँव के छाले न देखें,ज़िन्दगी रख्खें रवाँ,
ये न सोचें किसलिए अब रास्ता नापा करें,
कौन है यक़ता यहाँ पर सब के सब हैं एक से,
ख़ुद को अदना मान कर क्यूं दिल भला छोटा करें
फ़र्ज़ को अंजाम देना है बहुत तरतीब से,
हर नफ़स ही कीमती है वक़्त क्या ज़ाया करें....
उर्मिला माधव...
21.9.2016
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