इधर आइये
:) एक मज़ाहिया ख़याल----
------------------------------
कभी कभी ऐसा ख्याल भी...
ज़ुल्फ़ कांधों पै बिखराइये,
बाद उसके इधर आइये ,
मुझसे कहने लगे दीदावर,
चांदनी रुख पै ठहराइए,
मुझको कहना पड़ा देखिये,
मेरे रस्ते से हट जाइए
मेरी फ़ितरत ज़रा फ़र्क है,
ऐसा हरगिज़ न फरमाइए,
फ़ासले मुझको दरक़ार हैं,
चलत-फिरते नज़र आइये
उर्मिला माधव...
22.9.2014.....
Comments
Post a Comment