बनाया था
जब खुदा ने दहर बनाया था,
मेरे हिस्से में तू ही आया था,
तेरी जो उम्र एक अमानत थी,
वक़्त ने उसको लूट खाया था,
मेरी उम्मीद यूँ ही क़ायम थी,
गो कि हर रोज़ घर सजाया था,
शाम ढलने को जब भी होती थी,
चाँद तारों को....घर बुलाया था,
मेरी आँखें खुली-खुली ही रहीं,
तू कभी लौट कर न आया था,
कैसे मुझको यक़ीन हो कह दो,
मैंने पत्थर से दिल लगाया था,
मुझसे दुनियाँ के लोग कहते हैं,
तू ही तू मेरे दिल पै छाया था...
उर्मिला माधव...
18.9.2014...
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