घर आती है क्या

आपको आंखों की तुग़यानी नज़र आती है क्या ?
बेवज्ह भी यूँ किसीकी आंख भर आती है क्या ?

हम तो हैं अनजान ये सब आप ही बतलाइये
आह की तह में ख़ुशी की हद भी दर आती है क्या ?

मेरे सर की सरपरस्ती, सिर्फ़ रब करता है अब,
ग़ैर की ख़ातिर मुहब्बत चलके घर आती है क्या ?

उसको अपने वक़्त से आना है वो पाबंद है,
उसको कितना भी पुकारें,मौत पर आती है क्या ?

जब क़दम थक जाएंगे तो राह में पथ्थर भी हैं,
कोई भी मंज़िल हो आख़िर पूछ कर आती है क्या ?
उर्मिला माधव......
16.9.2017

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