हो गया क्या

मुहब्बत हुई तो बुरा हो गया क्या?
जफ़ाओं से दिल आशना हो गया क्या ?

बहोत जिसकी तुम पैरवी कर रहे थे,
वो माशूक़ तुम से जुदा हो गया क्या ?

ज़मीं पर कभी पाँव,रखते न थे तुम,
वो अंदाज़ बिल्कुल हवा हो गया क्या ?
उर्मिला माधव,

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