नींद आँखों में आये जाती है, मुझ पै बस मुस्कुराये जाती है, हर तरफ रौशनी का है आलम, तीरगी मुझ पै छाये जाती है, हुक उठती है दिल में रह-रह के, मुझ को बेजा दुखाये जाती है, अपने आपे में ही ...
कहीं भी राह में थक कर ठहर गई हूँ मैं कोई बताये के किस-किसके घर गई हूँ मैं, अजब अज़ाब था जो मेरी सम्त आया था, तमाम उम्र को ज़ख़्मों से भर गई हूँ मैं, मिरी हयात के अंजाम सब अधूरे हैं, यही ...
हम खड़े हैं, ज़मीन समझ कर जिसे, खिसक सकती है पैरों तले से, अद्भुत है,इसका खिसकना, कभी सदमे देखोगे तो शायद समझ सको, क्या होता है ज़मीन खिसकना, दरारें बड़ी हो जाती हैं, फिर नहीं भरतीं क...
ख़ुद समझना चाहते हो तब सही है, मेरी समझाने की ख़ाहिश कब रही है? तीरगी जिससे गुज़ारे हम गए थे, अब नहीं है, जब रही है, तब रही है, ग़म से हम दामन बचाना चाहते हैं, ज़िन्दगी बोझों तले अब दब रही ...
कुछ दोस्तों के नाम---- लोग जब इस्तेमाल करते हैं, लम्हा लम्हा हलाल करते हैं, कुछ सहूलत अगर नहीं पाई, फिर तो क्या क्या वबाल करते हैं, कुछ भी रिश्तों में ज़र्क आजाये, तब हजारों सवाल क...
हमें ख़ुद को ख़ुद आज़माने की ज़िद है, जहाँ को अक़ीदत जताने की ज़िद है, ब दम टूट सकते हैं मरने की हद तक, ये कूव्वत जहाँ को दिखाने की ज़िद है, मुहब्बत में झुकना,झुकाना अबस ही, ये अहमक चलन ह...
कुछ दोस्तों के नाम---- लोग जब इस्तेमाल करते हैं, लम्हा लम्हा हलाल करते हैं, कुछ सहूलत अगर नहीं पाई, फिर तो क्या क्या वबाल करते हैं, कुछ भी रिश्तों में ज़र्क आजाये, तब हजारों सवाल क...
ख़ुद को शायर तो सब समझते हैं, सच को कहने से...साफ़ बचते हैं, ख़ुद की नज़रों में ख़ुद मेयारी हैं, सातवें आसमां पै रहते हैं बात लिखते भी हैं मुहब्बत की, उसपे हाथों से मुंह को ढकते हैं, अब क...
अब तज़बज़ुब से दम निकलता है, ज़ेहन-ओ-दिल तिश्नगी से जलता है, मेरे ख़ैमे में इतने सूरज हैं, इनकी गर्मी से ग़म पिघलता है, सब बुझाती हूँ अपने हाथों से, रेज़ा-रेज़ा हो जिस्म गलता है, इतना आस...
ये दिल ढूँढता है जगहा अजनबी सी, हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी, कभी ज़िंदगी में ये दिन भी दिखाना, के हर सम्त इक अजनबी रंग लाना, ज़मीं अजनबी,आसमां अजनबी हो, कोई शख्स हो रु-ब-रु,अजनबी हो, लग...
ये तुम्हारे मन की ही परिकल्पना है मैं जहाँ हूँ बस वहीँ हूँ, दिन प्रतीक्षित हो गया, अनमने हो जानती हूँ, पर ये देखो वेदना का एक सागर, कर नही सकती हूँ मैं इसको उजागर, ये प्रतीक्षित ...
हर सदा का मिरी उसको एजाज़ था, फ़िर भी उसने कभी मुड़के देखा नहीं, उसको अंदाज़ा था मेरी तक़लीफ़ का, वो जो उम्मीद थी उस को तोड़ा नहीं, फ़िर कलेजे पे ग़म की परत जम गई, मुझको ख़ामोशियों ने झिंझोड़...
दूर से है दुआ सलाम अपनी, ख़ूब अलमस्त है ये शाम अपनी, पूछना चाहते हैं अब तुम से, ज़िन्दगी कर चुके तमाम अपनी ? होश आना हमें ज़रूरी था, बेख़ुदी कर रहे थे नाम अपनी, ख़ुद को फिर से उठाके देखा ...
चुपके से आए,जान-ओ-जिगर लूट ले गए, हमको बताया तक नहीं घर लूट ले गए , किसको बताएं हाल ऐसी बेबसी का उफ़, जीना मुहाल,शाम-ओ-सहर लूट ले गए, जो मुन्तजिर रहें तो भला क्या रहें कहो, हम उम्र भर च...
नीरव जंगल, नदी मौन है , कौन है? जो क्रंदन करता है? निष्ठा के दर्पण डोले हैं, किसके भाव कहाँ तोले हैं, मौन धरा है, मौन गगन है, दूर कहीं कोई स्वर उभरा है, आज बहुत बेचैन है धरती, बादल कोई ...
मैं तुमको ढूंढती थी,कल रात तुम कहाँ थे? आँखों में दम नही था,जज़्बात बस रवां थे, कुछ हौसला बढाकर देखा जो आसमां को, महताब कह रहा था तुम उसके रहनुमां थे, रह-रह के बिजलियाँ सी,कौंधा कर...
तुम अपनी बेरुख़ी का कोई नाम सोच लो, फिर क्या रहेगा बाद का, अंजाम सोच लो, किस-किसकी जुस्तजू में वफ़ा, ग़र्क़ हो गई, अब इसमें क्या मिलेगा ये इनआम सोच लो, उर्मिला माधव 24.5.2019
थोड़ा परदा किया कीजिये, तौबा-तौबा हया कीजिये, हम हैं ख्वाहिश अगर आपकी, दिल पै दस्तक दिया कीजिये, हैं अदीबों की हम ज़ात में, कुछ क़दम हौसला कीजिये , लोग देंगे भी क्या आपको, हमसे ही इ...
वो के जिनको थी ज़रूरत प्यार की, क्यों ........दुहाई दे गए दस्तार की... तितलियों के रंग दिखला कर हमें, बस .मिटाते हैं खिजालत हार की, हम से बढ़कर कौन जाना है उन्हें, दास्तां क्या है.... दिले बीम...
अपनों के सितम देख के दिल रूठ गया है, बेहद सताया जा चुका दिल .....टूट गया है.... जिसकी तलब में आ गई हूँ तेरे दर तलक, उसके ही ज़ेरे पाँव ये......दिल छूट गया है, apnon ke sitam dekhkar dil rooth gaya hai, behad sataaya jaa chuka dil toot gaya hai.. #urmilamadhav... 24.4.2015
अब रास्ते हमारे आसान हो गए है, हर बात हर बला से अंजान हो गए, रोया किये शबो-ओ-शब जिन हसरतों की ख़ातिर, कुछ यक़-ब-यक़ लगा हम नादान हो गए हैं, ता ज़िंदग़ी सम्हाला,जिन चाहतों को हमने, स...
राजनीति से कोई लेना-देना नहीं---- ====================== ज़हरीले नागों की तीर अंदाज़ी से, अच्छे-अच्छे बहक गए लफ्फाज़ी से, आसां नईं है खबरदार ख़ुद से होना, पीछे ही चलते सब इनकी राज़ी से, इनकी ही फितरत के फ...
दुनियां में किसी शै से मुहब्बत नहीं रही, हमको किसीके प्यार की आदत नहीं रही, आगे क़दम तो पीछे अदावत के जाल हैं, दिल से मिलें किसीसे भीे,चाहत नहीं रही, दिल के बहुत क़रीब थे जब वो बदल ...
हमारी डायरी से.... क्या बची आँखों में कुछ शर्मिंदगी है? या अभी तक भी मुसलसल गंदगी है? आग दरिया में लगा कर क्या करोगे? जिसकी फितरत ही सरासर बंदगी है, दिल हमारा खूब दरिया है अभी तक, इ...
यूँ ही हम भी घर से निकल पड़े, किसी रहगुज़र की तलाश में, कई मुश्किलें भी गुज़र गईं ,इसी इक सफ़र की तलाश में, मेरे ख़ुश्क होठों पे गर हंसी,कभी आई भी तो रुकी नहीं, तभी डगमगा के रुके क़दम किसी...
अहसास----- राह जो चलनी है इसमें खूबियाँ कोई नहीं, रूह-ए-खुद को छोड़ के वक़्त-ए-गिरां कोई नहीं, पथ्थरों के आदमी हैं और दहर जलता हुआ, चिलचिलाती धूप है ऑ आशियाँ कोई नहीं, और कितना आज़माना,...
लगा दो आग दुनिया में अगर दिल ख़ुद का जलता हो, करो तब्दील चीखों में अगर ग़म ना संभलता हो, अगर कोइ साथ ना दे टी तुम अपना आसमां रच लो, कलेजा चाक होता है, अगर ग़म दिल में पलता हो, Lagado aag duniyan main agar dil khud ka jalta ho, karo tabde...
वाद-ए सबा में देखो कुछ ऐसी सनसनी है, कहते भी नहीं बनता कि जान पर बनी है, एहसास मर रहे हैं तनहाइयों से घुटकर, इंसानियत की ज़द में इन्सान पर बनी है, चलना है ग़ैर मुमकिन इस राहे बेख़...
ये जो यादों का सिलसिला सा है, बे-वज्ह रेत का क़िला सा है , मैंने ग़म पहली बार ही देखा, फिर भी ये क्यूँ लगा मिला सा है, ज़ख्म पैवंद जैसा लगता है, ज़ीस्त के तार से सिला सा है, रात को घर जो ख्...
ज़िंदगी है या इक तमाशा है? इसमें भी ट्विस्ट अच्छा ख़ासा है, मेस्मरेज़म भी कम नहीं इसमें, पल में तोला है पल में माशा है, शौर्ट सर्किट से मर गया कोई, जिसके हाथों में एक कासा है, डैम के...
जब खुदा ने दहर बनाया था, मेरे हिस्से में तू ही आया था, तेरी जो उम्र एक अमानत थी, वक़्त ने उसको लूट खाया था, उस पे उम्मीद भी तो क़ायम थी, गो कि हर रोज़ घर सजाया था, शाम ढलने को जब भी होती थ...
हम गुज़र जाते हैं इक जद्दोजहद से, जब किसी को देखते हैं,बेश हद से.... दायरों की फ़िक्र में होकर परीशां, मांगते हैं बस दुआएं हम अहद से... ------------------------------------------------ ham guzar jaate hain ik jaddojahad se, dekhte hain jab kisi ko .....besh had se.... daayron ki fiqr men hokar pareeshaan, maangte hain bas duaayen ham ahad se... Urmila Madhav... 20.5.2016 अहद---ई...
कब से बुलंदियों को सज़ा दे रही हूं मैं, दिल को ग़लत जगह का पता दे रही हूँ मैं, सेहरा से रेत लेके,बनाया है पैराहन, तूफां को बिजलियों को सदा दे रही हूं मैं, दरकार ही नहीं है मुझे कोई ग़...
नींद हमारी,ख़्वाब हमारे, चेहरे के सब ताव हमारे, दिल,गुर्दा और बात जिगर की? ये मालो असबाब हमारे, फिर हम क्यूँ पामाल रहेंगे? क्यूँ कोई अन्दाज़ सहेंगे?? किसने तुम्हें बुलाया,और क...
ख़्वाब आते हैं?बात ठीक तो है, दिल लगाने को इक तरक़ीब तो है, दर्द ही दर्द है मुहब्बत में, ग़म नहीं दिलके कुछ क़रीब तो है, सुन तेरा नाम कोई लेता है, कम से कम इतना भी नसीब तो है..... उर्मि...
भित्ति चित्रों से उकेरे शब्दअब कुछ, जिजीविषा भी छल रही है जब स्वयं को, जो सवेरे श्वांस में अब तक निहित थे, आ खड़े हैं बेधने अंतर अहम् को, दूर की अब दृष्टि धुंधलाने लगी है, और कब तक ...
एक बचपन, तनहा माँ, शिफ़ाखानों के चक्कर काटती हुई, अतिब्बा के चेहरे ताकती हुई, वो तनहा तीन वर्ष, याद आ जाता है,माँ को, शून्य में बस देखना और सोचना, कौनसा रिश्ता,खंगालूँ? शायद कोई भ...
तू मुहब्बत में कभी रोया नहीं, बाद उसके आईना देखा नहीं, वक़्त के चेहरे की देखीं झुर्रियां, क्या दरूँ था ये कभी सोचा नहीं, उम्र भर तड़पे ये तनहा ज़िन्दगी, तूने शायद ऐसा कुछ खोया नही...
वक़्त सिखाता है ठहराव, पर तब तक निकल जाता है वक़्त, क्या करेगा ठहराव, जब ख़्वाहिशें अक़्ल से बड़ी हों लौटता कुछ भी नहीं, वक़्त तो किसी भी क़ीमत पर नहीं, कोई पहलू कितना भी गर्म हो, लावा ह...
सपना है तो.......टूटेगा ही, रिश्ता है तो.......छूटेगा ही, दिल आईना है तो आखिर, एक न एक दिन फूटेगा ही, दीवारें मसकन की...छोटी, रहजन चढ़कर...लूटेगा ही, चौकस रहना सीख ले वर्ना, छाती तब फिर...कूटेगा ही...
परीक्षा तो परीक्षा है अब वो चाहे जीवन की हो या पी.एच.डी.की प्रवेश परीक्षा हो... जो मिली गुरु से तुम्हारे,क्या वो दीक्षा छोड़ दोगे?? क्या किसी परिणाम के भय से परीक्षा छोड़ दोगे?? है सम...
परीक्षा तो परीक्षा है अब वो चाहे जीवन की हो या पी.एच.डी.की प्रवेश परीक्षा हो... जो मिली गुरु से तुम्हारे,क्या वो दीक्षा छोड़ दोगे?? क्या किसी परिणाम के भय से परीक्षा छोड़ दोगे?? है सम...
एक मैं हूँ और हुजूमे दुश्मनाँ, हूँ अकेली हाशिये पर रायगाँ, ख़ूब है अदबी सियासत,रंग पे, तू कलेजा देख मेरा जाने जाँ, मैं सहारों से नहीं चलती कभी, और नहीं दरकार कोई मेहरबाँ, उर्मिल...
तीरगी क़ैद में रहती है, रहबरी के लिए, ज़िन्दगी राह पै रख्खी है, ख़ुदकुशी के लिए, वो ख़ुदा होके ही मिलता है, अहले दुनिया से, उसकी आवाज़ भी उठ्ठी है, दिलबरी के लिए, बस ख़यालात में उलझे हुए ...
इक ज़रासा,रुख़ बदल कर देख लूं क्या, फिर तुम्हारे साथ चल कर देख लूं क्या? आंधियों का ज़ोर तो है मंज़िलों तक, फिर ज़रा गिर कर संम्भल कर देख लूँ क्या? ज़िंदगी का तो चलन हरदम वही है, फिर नए स...
हाकिम की भूल-- प्रगतिशील समय ने लगभग सभी को मोबाइल का प्रयोग करना सिखा दिया था सो भोला सरकार एक बड़े ऑफ़िसर के मातहत थे और उनके पास भी मोबाइल था, जो उनकी आगे की जेब में से अक्सर झा...