नीरव जंगल
नीरव जंगल,
नदी मौन है ,
कौन है?
जो क्रंदन करता है?
निष्ठा के दर्पण डोले हैं,
किसके भाव कहाँ तोले हैं,
मौन धरा है,
मौन गगन है,
दूर कहीं कोई स्वर उभरा है,
आज बहुत बेचैन है धरती,
बादल कोई पानी बरसाए,
जुगनूं का पहरा टल जाये,
उर्मिला माधव...
25.5.2015
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