दुश्मनाँ,

एक मैं हूँ और हुजूमे दुश्मनाँ,
हूँ अकेली हाशिये पर रायगाँ,

ख़ूब है अदबी सियासत,रंग पे,
तू कलेजा देख मेरा जाने जाँ,

मैं सहारों से नहीं चलती कभी,
और नहीं दरकार कोई मेहरबाँ,
उर्मिला माधव

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