लफ़्फ़ाज़ी से

राजनीति से कोई लेना-देना नहीं----
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ज़हरीले नागों की तीर अंदाज़ी से,
अच्छे-अच्छे बहक गए लफ्फाज़ी से,

आसां नईं है खबरदार ख़ुद से होना,
पीछे ही चलते सब इनकी राज़ी से,

इनकी ही फितरत के फंदे तगड़े हैं,
लाख दुहाई दिलवा दो तुम क़ाज़ी से,

ऐसे भी इन्सान मगर कुछ होते हैं,
जल्वे इनके कम नईं होते गाज़ी से,

ऐसे दिल के सानी मुश्किल मिलते हैं,
जिन्हें असर नईं होता शोशे बाज़ी से...
उर्मिला माधव...
23.5.2014...

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