दिलबरी के लिए

तीरगी क़ैद में रहती है, रहबरी के लिए,
ज़िन्दगी राह पै रख्खी है, ख़ुदकुशी के लिए,

वो ख़ुदा होके ही मिलता है, अहले दुनिया से,
उसकी आवाज़ भी उठ्ठी है, दिलबरी के लिए,

बस ख़यालात में उलझे हुए आशिक़ के हुज़ूर,
कितनी शाइस्तगी बचती है, बंदगी के लिए,
उर्मिला माधव
17.5.2019

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge