कहानी भाग 1
हाकिम की भूल--
प्रगतिशील समय ने लगभग सभी को मोबाइल का प्रयोग करना सिखा दिया था सो भोला सरकार एक बड़े ऑफ़िसर के मातहत थे और उनके पास भी मोबाइल था, जो उनकी आगे की जेब में से अक्सर झांकता रहता था,जिस ऑफ़िसर के यहां वे मातहत थे वो थे तो बड़े नेकदिल इंसान पर कभी-कभी उनका मिज़ाज अचानक ही बहुत उखड़ जाया करता था और उस वक़्त उनकी नेकदिली जाने कहाँ हवा हो जाती थी, किसी के भारी से भारी नुकसान की परवाह नहीं किया करते थे जबकि आदतन वो सबका भला ही चाहते थे..
एक दिन भोला सरकार अपनी बीमार पत्नि को घर पर छोड़ कर आये थे अपने हाकिम से छुट्टी की दरख़्वास्त के लिए बात करना ही चाहते थे कि पता चला आज उनके हाकिम का मिज़ाज बिगड़ा हुआ था और वो बड़े परेशान थे कि कैसे छुट्टी की दरख़्वास्त करें, पर फ़िर भी कहना तो था ही क्यूंकि उनकी पत्नि सेहतमंद नहीं थीं वो हाकिम के सामने पहुंचे ,कुछ कहते तभी अचानक उनका मोबाइल बज उठा और वो एक तरफ जाकर उसको कान पर लगा कर सुनने लगे, बेटी की आवाज़ घबराई हुई थी और वह कह रही थी कि मां की तबियत अच्छी नहीं लग रही थी सो आप घर आ जाएं वो एकदम घबराई हुई हालत में हाकिम से बोले कि वो घर जाना चाहते हैं क्यूंकि उनकी पत्नि की तबियत सही नहीं थी।।
हाकिम का मिज़ाज चूंकि बिगड़ा हुआ था सो बरस पड़े उनके ऊपर और बोले कि सभी मातहतों के परिवारों की ज़िम्मेदारी उनकी नहीं, घर की मुश्किलात को घर छोड़ कर आएं और यहाँ आकर अपने सभी कामों को सही अंजाम दें। भोला सरकार जो कि यथा नाम तथा गुण थे कुछ सोचने समझने के हालात में नहीं थे, नर्म लहजे में बोले, हुज़ूर मैं कुछ दिनों की छुट्टियां चाहता हूं इसलिए मुझे इजाज़त दी जाए, मैं घर जाना चाहता हूँ, फ़िर क्या था हाकिम बरस पड़े और बोले आपका दिमाग़ ख़राब है क्या आप देख रहे हैं मेरे मिज़ाज सही नहीं और आप फ़िज़ूल बकवास किये जा रहे हैं, आप कहीं नहीं जा सकते ख़ामोशी के साथ अपना काम कीजिये।
भोला सरकार कुछ देर कशमकश की हालत में खड़े रहे और क्या हाकिम कह रहे थे, उनको कुछ सुनाई नहीं दे रहा था तभी अचानक ही उन्होंने फैसला किया और बस वहां से चल दिये , अपने सम्मान से और बीमार पत्नि की सेहत से समझौता नहीं कर सके थे, नौकरी छोड़ कर चले आये......
उर्मिला माधव,
16.5.2018
To be continued.....
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