जब किया रब ने इशारा सो गये, उठ गए तो फिर उसी के हो गए, उसकी रहमत और हमारी ज़िंदगी, मुब्तिला इतने हुए बस खो गए उसकी जानिब से हुआ रौशन चराग़, जो जहां थे सर ब सजदा हो गए... उर्मिला माधव 1.2.2018
फिल्बदीह के तह्त कही गई ग़ज़ल---- तीर अब दिल पर चलाना छोड़ दे अपनी खातिर एक ख़ाना छोड़ दे, मैक़दों में आना जाना भूल कर, हंस ज़रा दिल का जलाना छोड़ दे, क्यूँ रहे खुशियों से यूँ महरूम तू, होश म...
Tujhko iimaan ki qasam,saahib-e-iimaan to ho, Or kuchh ho ke na ho,haq se musalman to ho :: तुझको ईमां की क़सम,साहिब-ए-ईमान तो हो, और कुछ हो के न हो,हक़ से मुसलमान तो हो, :: Mera daawaa hai asar baat se hota hai zuruur, Or kuchh ho ke na ho,dil se suleman to ho :: मेरा दावा है असर बात से होता है ज़ुरूर और कुछ हो के न हो,दिल से सुलेमान त...
आपने पत्थर उठाया फेंक कर मारा ज़ुरूर, हम ही शर्मिंदा हैं क्यों ये लग नहीं पाया हुज़ूर, ख़ैर जाने दीजिए,ग़म छोड़िये इस बात का, फिर मशक़्क़त कीजिये ऑ फेंकिये फिर बा शऊर, दीजिये इसको मु...
husn ka bhi kya meyaari khel hai, Aashiqon ki khoob relam pel hai... Waah waahi loot'ta hai husn khoob, Aql se wo chahe bilkul del hai, :: हुस्न का भी क्या मेयारी खेल है, आशिक़ों की ख़ूब रेलम पेल है.. वाह वाही लूटता है हुस्न ख़ूब, अक़्ल से वो चाहे बिलकुल डेेल है.. उर्मिला माधव
एक मतला दो शेर .... ------------------- ज़ख्म दिल के छुपालो कहीं सा'ब जी, गर है हिम्मत चुका लो यहीं सा'ब जी, कुछ मुझे भी बता दो,ग़मों की दवा, जो अगर दिल संभालो कहीं सा'ब जी, खूब आंसू ये आहें,ये गम के धुंए, क्...
हम किसी तौर मुतास्सिर नहीं होने वाले, तेरी दुनियां में अब हाज़िर नहीं होने वाले, प्यार में शर्त है, दम-ख़म हो जिगर हो अपना, कोई भी दोस्त तेरी ख़ातिर नहीं होने वाले.... उर्म...
अंतहीन आकाश, ऊँचाई नापता हुआ जीवन, साँसें तौलता हुआ जीवन, घर से निकलते हुए, भीड़ में चलते हुए, हर तरह सँभलते हुए, ठोकरों,टक्करों, से सामना, बिना किसी कारण, धिक्करित होते हुए, विस...
विधिवत कार्य किया जीवन ने, जो भी प्रिकृति नियत करती है, व्यक्ति "विशेष"नहीं है इसमें, अनुबंधित जीवन हैं सबके, जीवन भर प्रत्येक व्यक्ति ही, अनुबंधित जीवन जीता है,
दो किनारे हैं नदी के, एक मैं हूँ एक हो तुम , ये बताओ किस तरह मिल पायेंगे, जब नदी जितनी उफन कर आएगी, दूर बिलकुल दूर होते जायेंगे, जब कभी तेज़ी बढ़ेगी धार की, तब कहाँ उम्मीद होगी पार की, ...
तिरछी नज़र की धार पे क़ुर्बान हो गए, यूँ दिल की खुदकुशी पे पशेमान हो गए, अपने मिजाज़ में तो कभी आशिक़ी न थी, पर ऐसा कुछ हुआ के परेशान हो गए, अंदाज़ अपनी रूह के बस ज्यों के त्यों रहे हम ह...
आप ओहदे में कुछ बड़े हैं तो ? ख़ास मंज़िल पे ही खड़े हैं तो? गोया तकदीर के सिकंदर हों, पर भी सुरख़ाब के जड़े हैं तो ? हम न माने हैं,और न मानेंगे, अब अगर जिद पै ही अड़े हैं तो ? उर्मिला माधव 28.1.2015....
फिल्बदीह के तह्त कही गई ग़ज़ल---- तीर अब दिल पर चलाना छोड़ दे अपनी खातिर एक ख़ाना छोड़ दे, मैक़दों में आना जाना भूल कर, हंस ज़रा दिल का जलाना छोड़ दे, क्यूँ रहे खुशियों से यूँ महरूम तू, होश म...
2014 में लिखी एक ग़ज़ल--- ये तो ज़ाहिर है,वो बिलकुल बे-वफ़ा है, हाँ मगर दिल का अलहदा फ़लसफ़ा है, क्यूँ किसी इन्सान का शिकवा करूँ मैं, गम मेरी तक़दीर का अव्वल सफ़ा है, बारहा तन्हाइयां हैं,बारहा ...
ज़िन्दगी थक हार कर ही चल रही है आजकल, खुल सभी की शख़्सियत हर पल रही है आजकल, एक लहज़ा भीड़ जो देखी तो हम घबरा गए, अब बची तन्हाई है सो खल रही है आजकल, दिन निकलते ही उदासी,घिर के आती है सो अ...
ज़िन्दगी तुझसे मैं नाराज़ भी हो सकती हूँ, ख़ुद-ब-ख़ुद मरने को तैयार भी हो सकती हूँ, चाहे जितना भी निबाहा हो तिरे साथ मगर, एक इनसान हूँ हस्सास भी हो सकती हूँ, दिन निकलते ही जो मैं जिस्...
2014 में कहा गया एक कलाम संभवतः उससे भी पहले---- तारीफ़ करूँ क्या जज़्बे की, बस एक दिन भारत भारत है, क्या खूब खिलौने चाबी से..... चलते हैं बहुत हिक़ारत है, आपस में झगडे करते हैं, गद्दी की खाति...
तुम तो अजीब हाल में ले आए हो हमें, दुनिया के कैसे जाल में ले आए हो हमें, हम तो नसीमे सुब्ह के बस मुन्तज़िर रहे, हद ये कि किस वबाल में ले आए हो हमें, पर्दे हटा के खींच के माज़ी में ले गए, ...
गहरे ज़ख़्मों पे चोट खाते हैं, अहले दिल यूँ ही मुसकुराते हैं, ग़ुज़रे शामो सहर किसी तरहा, रात होते ही टूट जाते हैं, दर्दे क़ुरबत से रू-ब-रू होकर, चश्मे ग़िरियाँ में डूब जाते है...
कितनी हैरत है गिरा,सब्ज़ शजर देखा है, वक़्त-ए-मुश्किल में बहुत ख़ूब, ये डर देखा है, चश्म-ए-गिरया का अँधेरा ही रहा आठ पहर, किस से ये कहते फ़क़त दर्द-ए-जिगर देखा है, यूँ तो नाज़ुक था,यही कहत...
Chuk gaye tum or ham bhi chuk gaye Sab yahin aakar achanak ruk gaye, चुक गए तुम और हम भी चुक गए, सब यहीं आकर अचानक रुक गए, Jo chale tan kar jahan main umr bhar, Rasta chalte hii chalte jhuk gaye, जो चले तन कर जहाँ में उम्र भर, रास्ता चलते ही चलते झुक गए... #उर्मिलामाधव, 23.1.2016
कैसे जीते हैं इधर देख ज़रा घर से निकल, आग पीते हैं इधर देख ज़रा घर से निकल, तेरी खिड़की जो हर इक शाम कहीं बंद हुई, हाथ रीते हैं इधर देख ज़रा घर से निकल, कितने गहरे हैं मेरे ज़ख़्म बड़ी म...
ये उठते हुए ग़ुबार दिल में, थका देते हैं,पाँव बंध जाते हैं, आहटें थका देती हैं कानों को, ख़त्म होती हुई जिंदगियां, रुला देती हैं आंखों को, गर्द में मिला देती है ज़मीन आंसुओं को, बवं...
तनहा खड़ी रही मैं समंदर के बीच में, तूफ़ान मुश्किलों के बवंडर के बीच में, ताने गए जो मेरी शिकस्तों के वास्ते, कम फासले थे मेरे ऑ खंजर के बीच में, ताक़ीद ये हुई थी के हंसना है अब हराम, ...
दिलजले महबूब की बांहों का कोई क्या करे?? ख़ार से लिपटी हुयी राहों का कोई क्या करे?? एक हसरत के लिए..दुनियां नज़र अंदाज़ हो, इस क़दर बहकी हुयी चाहों का कोई क्या करे?? ग़र्क़ हो ऐसी मुहब्बत...
अरबों-खरबों शनास दुनियां, तेरे इलज़ाम से जड़ी दुनियां, तेरी नज़रों में बस पड़ी दुनियां, कौन ख़्वाहिश में किसकी रहता है, किसके रस्ते में है खड़ी दुनियां? चलते-चलते थके हुए से क़दम, रो...
एक जब बिछड़ा है,दूजा आएगा ही, और जो आया है वो भी जाएगा ही, मन न मैला कर मुसफिर, रास्ता है, एक दो ठोकर तो यूँ भी खायेगा ही, उठ भी जा होजा खड़ा पैरों पै अब, चल, अँधेरा और भी गहराएगा ही, ख़ूब ह...
सिर्फ़ हंसने को बहाना चाहती हूँ, मैं कहाँ सबको हंसाना चाहती हूँ, गर उमड़ आए समंदर अश्क़ का, तब मैं तनहाई में जाना चाहती हूँ, ग़ैर के कांधे की तालिब किसलिए, बार अपना ख़ुद उठाना चाहती ...
जाओ मगरूर तुम भी हो जाओ, जाओ और दूर तुम भी हो जाओ, मुफ़्त हलकान जैसे रहते हो, जाओ मशहूर तुम भी हो जाओ, इसमें क्या-क्या मज़ा है,देखोगे? जाओ मजबूर तुम भी हो जाओ, तुमको दिल से दुआएं देती ...
बस जुदा होकर हरासां कर गया, ज़िन्दगी लेकिन चरागां कर गया, जब ये पूछा साथ तो चल पाओगे ? उलझनों में था सो हाँ हाँ कर गया, देखते बनती थी उसकी कश्मकश, मुस्कुराने भर को सामां कर गया, क्...
दिल की खारिश को जुबां पर लाये क्यूँ ? जी नहीं था तो यहाँ तक आये क्यूँ बस तुम्हारी ख़ुद ख़याली है अज़ाब, आ ही पहुंचे हो तो फिर पछताए क्यूँ ? क्यों कोई मानेगा तुमको नाख़ुदा, जान कर ये धो...
एक बार फिर से दिल यही कहना चाहता है। .. मुझको परवाह क्यों नहीं रहती ? लब पे कोई आह क्यों नहीं रहती? कोई इज़हार-ए-इश्क़ करता रहे, दिल में कोई राह क्यों नहीं रहती ? भाते रहते हैं कितने च...
पैगाम आया है,बाहर से, लोग कहते हैं के तुम नहीं रहे और फिर जल भी गए, बस एक बार, और मैं हर रोज़ ही ज़िन्दा जली, क्रम कभी टूटा नहीं, बिना लकड़ियों की आग में, मेरी छाती में हजारों आग हैं, ता...
सायबानों से आसमानों तक, अपना चर्चा रहा ज़ुबानों तक, दश्त-ओ-दहशत से कौन उलझेगा, हमने ख़ुद को रखा मकानों तक, वो तो गरदन हलाक कर देते, बात उलझी रही निशानों तक, हमने वो राह ही बदल डाली, ...
सहर को शम्मा जलाने की बात करते हैं, समझ सको तो ठिकाने की बात करते हैं, वो सिर्फ अपने लिए जाम कर रहे हैं तलब, हम हर किसीको पिलाने की बात करते हैं.. वो बागबाँ जो कि गुंचों से बैर हैं ...
उसका सर भी कलम किया जाए, जिसको रह-रह के ग़म दिया जाए, ग़र तगाफुल में रंग भरना हो, सिर्फ़ गर्दन को ख़म किया जाये, जीते जी मारना है उसको गर, उसपे चर्चा भी कम किया जाए, उर्मिला माधव... 18.1.2016
मुरदार जबसे आदमी की ज़ात हो गई, कुल जिंदगी ही अहले ख़राबात हो गई, हमने जो एक तिफ़्ल को गोदी में क्या लिया, उसकी हंसी तो रंग-ए-तिलिस्मात हो गई, हम दर-ब-दर भटकते रहे जीस्त को लिए लो यक-ब-...
प्यार का जाम पियो,गर जो पिला दे कोई, इतना एहसास रहे......ग़म न बढ़ा दे कोई... ख़ुद पस-ए-पर्दा रहो, धूल बहुत उड़ती है, अपनी ठोकर से कहीं ख़ाक उड़ा दे कोई, सांस तरतीब से आ जाये के इतना तो रहे, दर्द क...
खूब कारोबार लफ़्ज़ों का करें हैं, दूसरों के घर में,जो झाँका करें हैं तीलियां रख्खें हैं मुठ्ठी मैं दबाकर, राख़ में चिंगारियां झोंका करें हैं, कांच की दीवार वाले घर जिन्हों के, व...
जिस्म का ये बोझ कब हल्का हुआ है, जिल्द बनकर रूह से चिपका हुआ है, आईना सच बोलता है फितरतन ही, बेसबब ही हर जगह रुसवा हुआ है, दश्त से गुज़रे तो ख़ुद को छोड़ आए, ज़ेह्न है के आज तक अटका हुआ ह...
Kab kise thukraenge wo janta hai, Kis jagah ruk jaenge wo janta hai, Apne hathoN me kahaN koii bhi taqat, Kb kahaN jhuk jaenge wo janta hai Urmila Madhav
माहपार-ए-दरख्शां बहुत खूब है, प्यार मेरा मगर तुमसे मंसूब है, जानना है ज़रूरी सुनो दीदा वर, बा-वफाई मुहब्बत का उस्लूब है आफरीं-आफरीं मेरा दीवाना पन, लोग कहते हैं वो देखो मज्जूब ...
मुहब्बत को निभाने में न जाने खो गया क्या-क्या, जुदाई बाद वो जाने के आख़िर ,हो गया क्या-क्या.. जहाँ वाले मिरी तस्वीर का रुख़ देखते भी क्यूँ, कहाँ ज़ाहिर किया मैंने के मेरा रो गया क्य...
बाँहों में उनकी आये तो आँखों में खो गए, शाने पे सर को रख के..बिताई तमाम रात... फिर होश ही किसे था,कहाँ रात कट गई, उनकी जुदाई उनको.....सुनाई,तमाम रात, उर्मिला माधव. 15.1.2017
अपनी ज़ाती ज़िन्दगी में,बाख़ुदा कोई नहीं, जो भी कुछ थे आप थे बस,दूसरा कोई नहीं, कितने लम्बे रास्ते तनहा किये तय उम्र भर, सबका इस्तकबाल था पर नाख़ुदा कोई नहीं, सब अकेले ही उठाते अपन...
आपके दामन में खुशियां कम अगर थीं तो हमें फिर कुछ न देते, क्या कहें अब इससे बेहतर तो यही था जो दिया वो उफ़ न देते, याद करिये इससे पहले भी तो हमने ज़िन्दगी ख़ुद,जी हमेशा, बात ये है कुछ न...
ये कोई जिस्म हुआ...ज़ख़्म ज़माने भर के, चार क़दमों ही पे याद आएं ,ठिकाने घर के.. क्या मिलें उनसे न अख़लाक़-ए-मुहब्बत न लिहाज़, जिन के होठों पे महज़, प्यार दिखाने भर के, उर्मिला माधव .. 15.1.2018
हम जो रिश्तों की आस रखते हैं, यूँ ही उम्मीद ख़ास रखते हैं , जब ये दुनिया बदल गयी है तो, बे-वज्ह दिल उदास रखते हैं, जिनको बस दायरों से निस्बत है, खुद को ही आस पास रखते हैं, वो जो इंसां ...
जनाब हफ़ीज़ जालंधरी की ज़मीन पर आज की फिल बदीह में कही गई ग़ज़ल------------- ------------------------------------------------------ मुरदार जबसे आदमी की ज़ात हो गई, कुल जिंदगी ही अहले ख़राबात हो गई, हमने जो एक तिफ़्ल को गोदी में क्या लिया, उसक...