लाए क्यों
दिल की खारिश को जुबां पर लाये क्यूँ ?
जी नहीं था तो यहाँ तक आये क्यूँ
बस तुम्हारी ख़ुद ख़याली है अज़ाब,
आ ही पहुंचे हो तो फिर पछताए क्यूँ ?
क्यों कोई मानेगा तुमको नाख़ुदा,
जान कर ये धोखे तुमने खाए क्यूँ??
कामयाबी नर्म लहज़े की गुलाम,
इस क़दर तेवर भला दिखलाए क्यूँ,
खुद-ब-खुद अपना रवैय्या लो बदल,
अब ज़माना ही तुम्हें समझाए क्यूँ
उर्मिला माधव...
21.1.2015
उर्मिला माधव
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