ले आए हो हमें
तुम तो अजीब हाल में ले आए हो हमें,
दुनिया के कैसे जाल में ले आए हो हमें,
हम तो नसीमे सुब्ह के बस मुन्तज़िर रहे,
हद ये कि किस वबाल में ले आए हो हमें,
पर्दे हटा के खींच के माज़ी में ले गए,
बेवज्ह गुज़रे साल में ले आए हो हमें,
उर्मिला माधव
25.1.2019
Comments
Post a Comment