सा'ब जी
एक मतला दो शेर ....
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ज़ख्म दिल के छुपालो कहीं सा'ब जी,
गर है हिम्मत चुका लो यहीं सा'ब जी,
कुछ मुझे भी बता दो,ग़मों की दवा,
जो अगर दिल संभालो कहीं सा'ब जी,
खूब आंसू ये आहें,ये गम के धुंए,
क्या ज़हर जाके खालो? नहीं सा'ब जी...
उर्मिला माधव...
29.1.2014..
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