बात करते हैं
सहर को शम्मा जलाने की बात करते हैं,
समझ सको तो ठिकाने की बात करते हैं,
वो सिर्फ अपने लिए जाम कर रहे हैं तलब,
हम हर किसीको पिलाने की बात करते हैं..
वो बागबाँ जो कि गुंचों से बैर हैं रखते,
ये आप ही के ज़माने की बात करते हैं..
उर्मिला माधव...
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