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Showing posts from February, 2019

नज़र रखिये

अपने जज़्बात पे नज़र रखिये, दिल की हर बात पे नज़र रखिये, अश्क़ बहना तो बे-गुनाही है, सिर्फ़ तादात पे नज़र रखिये, ग़म पसे पर्दा-ए-हिज़ाब रहें, अपने हालात पे नज़र रखिये, दर्द हद से गुज़रना ठी...

आसान हूँ

सब समझते हैं बहुत आसान हूँ, जैसे मैं दिलजोई का सामान हूँ, दिल्लगी करते हैं मुझसे बेसबब, बेरुख़ी का मैं अजब उन्वान हूँ, मेरी जानिब से सभी आज़ाद हैं, मैं तो अपने आप में ज़िंदान हूँ, म...

लगाए रख्खा

बे-वफ़ा दोस्त को ...सीने से लगाए रख्खा, उसने भी झूठ को हर दर्ज़ा निभाये रख्खा, उसकी ख़ामोश सी रंजिश को हवा देते रहे, हमने मुस्कान को होठों पै सजाये रख्खा, हम दिखाने में कसर किसलिए रख...

यक़ ब यक़

तीन शेर--- ----------- आज ये ज़ाहिर हुआ है यक-ब-यक, साथ भी देगी नहीं जब सांस तक , राब्ते अब तक रहे जो राह से, क्या चलेंगे आख़री एहसास तक ?? कोई भी यकता नहीं इस खेल में, हो गए ख़ामोश ख़ासम ख़ास तक..... उर्मि...

संवरते रहे

एक मतला दो शेर... -------------------- चाह मिलने की लेकर.....संवरते रहे, सीढियां घर की......चढ़ते-उतरते रहे , उनकी गलियों का नक्शा लिए हाथ में, कुछ लकीरों से कागज़ को भरते रहे.. क्यूंकि हिम्मत हमारी दगा दे ग...

बचते हैं

लोग तो ख़ुदकुशी से बचते हैं, हम हैं के ज़िन्दगी से बचते हैं, एक ही जिस्म है सो मिट्टी का, एहतियातन नमी से बचते हैं, किस लिए दर्द में इज़ाफ़ा हो, इश्क़ ऑ दिलबरी से बचते हैं, जिस्म को अब क...

सफ़ीना है

अश्कों से भरी हैं ये आँखें, ज़ख़्मों से भरा ये सीना है, बरपा है क़ह्र तक़लीफों का,आया होठों पै पसीनाहै, हर ज़ख़्म लहू जब देता है, मजबूर नज़र चकराती है, अब शान-ए-क़रीमी रख अपनी तू...

मिल जाएंगे

मेरे घर तशरीफ़ जब भी लायेंगे, ग़म दरीचों पै रखे मिल जायेंगे, क्या ही इस्तक़बाल होगा आपका, जब दर-ओ-दीवार भी गिर जायेंगे, और कहीं मलबे के नीचे ढेर में, कुछ निशाँ नाचीज़ के मिल जायेंगे, ...

बोल ली जातीं

हमारी डायरी से---- फ़क़त रेशम सी गांठें थीं...ज़रा सी खोल ली जातीं, जो बातें दिल को चुभती थीं,जुबां से बोल लीं जातीं, अगरचे खौफ़ इतना था...कोई दिल पर न लेजाये, कहीं कहने से पहले एहतियातन...त...

कन्याओं को समर्पित

सभी कन्याओं को समर्पित.... ज़बरन पैदा होगये वरना हमको लोग भगा देते, अगर ज़रा भी बस में होता जिंदा ही दफ़ना देते, क़िस्मत के आगे दुनिया का जोर न चल पाया वर्ना, लोगों के ग़र बस में होता,वह...

मुक़ाबिल कौन है

फ़िलबदीह का हासिल ढूंढिए इस शह्र में अब रूह-ए-बिस्मिल कौन है और ज़रा बतलाइये किसके मुक़ाबिल कौन है मैंने मीज़ानों से पूछा,ताक़ पर रख कर ज़मीर अपनी इन बर्बादियों में और शामिल कौन ह...

Aa raha hai koii

janab Ahmad faraz ji ki zamiin par filbadih men likhi gai gazal--- misra (Ghum e hayaat ka jhagra mita raha hai koyi. Chale bhi aao k duniya se ja raha hai koyi. ) ----------------------------------------------------------------- bade adab se mujhe ye bataa rahaa hai koii, abhii n jaao abhii,milne aa raha hai koii, mujhe supurd-e-zamiin der se kiyaa jaaye, ke waqtii taur ka rishta nibhaa rahaa hai koii, ajab chalan hai zamaane ka ek zamaane se, mare hue kii lahad kyon sajaa raha hai koii, mujhe khabar hai mera or kya-kya hona hai, vajood-e-jism ka qissa mita raha hai koii, isii jahaan men,mujhse hai koi babasta, lo meri maut ka qarzaa chuka raha hai koii main ab to khaak hun,nazron men is zamaane ki ajab junoon hai ke ab bhi aa raha hai koii Urmila Madhav 27.2.2016

आ रहा है कोई

बड़े अदब से मुझे ये बता रहा है कोई, अभी न जाओ अभी मिलने आ रहा है कोई, मुझे सुपुर्द-ए- ज़मीं, देर से किया जाए, के वक़्ती तौर का रिश्ता निभा रहा है कोई, अजब चलन है ज़माने का इक ज़माने से, मरे ह...

आदत से अनजान

मेरी आदत से अनजान, यार बुरा माने तो मान, अच्छा बुरा,समझना सीख, वरना तेरी तू ही जान, कच्ची गोली खेला है क्या? हुई नहीं अब तक पहचान? तुझको अक़्ल नहीं जो अपनी, आ हम से लेले नादान, कौन सफ़...

रात भर

बेसबब उलझे रहे एक ख्वाब मेँ हम रात भर किस जहाँ मेँ खो गए समझे नहीं हम रातभर दम-ब-दम हम जा रहे थे जानिब-ए-मन्जिल मगर जाने वो क्या राह थी चलते रहे हम रात भर कोई सहलाता रहा सर गोद मेँ ...

हम किसके हैं

एक मतला तीन शेर--- ============ मुरली वाले राधा के हैं, ये बतलाओ हम किसके हैं?? :( खुशियाँ लेकर नाच रहे सब, दुनियाँ भरके गम किसके हैं?? :( करें मुहब्बत सर पर रखलें इतने हसीं सनम किसके हैं?? :( आला ख़ुद ...

बे-ख़बर

एक मतला एक शेर पाँव मेरे हैं ज़मीं पर,आसमां पर है नज़र, पीठ दुनिया की तरफ है,पर नहीं हूँ बे-ख़बर, है इरादों में बुलंदी और चमक,आँखों में है, किस तरह होगी भला परवाज़ मेरी मुख़्तसर, उर्मि...

औरत हूँ दिल्ली की

दिल्ली की औरत------ एक नज़्म  हालत-ए-हाज़िरा पर... लो मेरी दास्तां सुन लो मैं हूँ ख़ातून दिल्ली की, हिली जाती है अब बुनियाद,अफ़लातून दिल्ली की, नहीं महफूज़ अस्मत है,के दिल में ख़ास दहशत है, ...

ज़रूरी नहीं

तीन शेर---- ये हकीक़त है आलिम नहीं हूँ मगर, बढ़ के पीछे हटूं........ये ज़रूरी नहीं, आप अपनी कहें,और मैं अपनी कहूं, ज़ावियों से कटूं.........ये ज़रूरी नहीं, हो ये मुमकिन कि सानी नहो आपका!! फिर भी मैं जा ...

मत करना

इतनी ऊंची उड़ान मत करना, चाह को आसमान मत करना, बात कहना तो वो मुक़म्मल हो, अपनी झूठी ज़बान मत करना, itnii oonchii udaan mat karnaa, chaah ko aasman mat karnaa, baat kahnaa to wo muqammal ho, apnii jhoothii zabaan mat karnaa... उर्मिला माधव... 25.2.2014..

शामिल हो

Ek matlaa Hamd se.... जिसमें रब की दुआ न शामिल हो, वो इबादत हराम है मुझको, जिसमें रब की रज़ा न शामिल हो, वो इजाज़त हराम है मुझको... :: Jismen rab ki dua n shamil ho, Wo ibadat haraam hai mujhko, Jismen rab ki razaa n shamil ho, Wo ijazat haraam hai mujhko... Urmila Madhav... 25th February 2016

दुनिया बदलेगी

गहराई में .....कितने चेहरे डूब रहे, जब तक जीते रहे,जहां में ख़ूब रहे जब दुनिया जागेगी, दुनियां, बदलेगी, दुनियां के बस यही महज़ उसलूब रहे.. उर्मिला माधव 25.2.2018

अब भी याद आता है

तू मुझे याद अब भी आता है, रोज़ ख्वाबों में मुस्कुराता है, दिल मगर टूट जो गया है अब, लाख चाहूँ न गुनगुनाता है, बीते लम्हों की याद आते ही, हौसला रोज़ डगमगाता है, तेरी आमद से ये हुआ आख़ि...

क्या होता है

एक मतला दो शेर----- हुए हज़ारों टुकड़े दिल के,और क़ह्र से क्या होता है ? हम मानिंन्द हुए मुर्दे के,और ज़ह्र से क्या होता है ? जिसकी हो जागीर हमेशा रहे उसी की मरते दम तक, कोई इस्तक़बाल कहे ब...

ताक़ पर

क्या कहें हालात हैं,तहज़ीब रक्खी ताक़ पर, रंग में कालक मिलाई और घुमाया चाक़ पर दिल में लाखों मैल लेकर,दिल मिलाने आगये, बे-हयाई का चलन है समझें हैं बेबाक़ पर.... अब वो रंगा-रंग जैसा होल...

अदा के दीवाने

हम अपनी अदा के दीवाने,अन्दाज़  में अपने जीते हैं, ऐलान है अपनी जानिब से,जो चाहे बग़ावत कर बैठे, ये ज़ेब भी उसको देता है, जो नया-नया हो दुनियां में, आज़ाद ख़याली है उसकी, जो चाहे शरारत क...

मुहब्बत कर बैठे

इस दिल में अबस इक आग लगी, हम ख़ुद से बगावत कर बैठे, बेताबी-ए-दिल जब हद से बढ़ी, घबरा के मुहब्बत कर बैठे, अय जाओ मियां तुम आज तलक, इक ग़म का रोना रोते हो, एक रोज़ ये हमसे भूल हुई, सहरा से अदा...

संभलता नहीं है

ग़म बहुत है संभलता नहीं है, बोझ ये मुझसे चलता नहीं है, क्यूँ है ख़ामोश ये शहर इतना, कोई राहों पे चलता नहीं है किससे पूछें निशाँ मन्ज़िलों के, एक भी शख़्स मिलता नहीं है, बेवजह को...

तमाशा दुनिया का

ग़र वक़्त बदल ले नज़र कभी, काली हो  शहर में सहर कभी, मिल जाए हवा में ज़हर कभी, जारी हो मुसलसल क़हर कभी, पर एक जगह रुक जाना नहीं , हालात से बस घबराना नहीं, इलज़ाम किसी पै लगाना नहीं, देना है ...

आगाज़ देती है

मेरे बेटे मधुवन ऋषिराज की लिखी एक ग़ज़ल ------------------------------------------------ वो मुझको सहर देती है, मुझे आग़ाज़ देती है वो मुझको इल्म देती है, अलग अंदाज़ देती है जिन्होंने ज़िन्दगी खाई, उन्हीं माज़ी के गिद...

ठहरी हुई झील सी

जिंदगी, ठहरी हुई झील सी, और ये बिखरी हुई सी बीनाई मंज़रों की दिलकशी, खोई हुई सी, शाम है धुंआ-धुंआ, और फ़लक सुनसान सा, गो के बिन माह-ओ-अख्त़र सा, ग़म मगर छाती पर, जिरह बख्तर सा, न तीर,न तलव...

याद आ रहा है

कौन मुझको याद इतना आ रहा है, वक़्त फिर से रतजगा,दोहरा रहा है, नींद आँखों से उड़ी जाती है मेरी, और अँधेरा,इस क़दर,गहरा रहा है, ये जो है सैलाब मेरे आंसुओं का, मेरे दिल को बे-वफ़ा ठहरा रहा ...

कर लिया क्या

फिर से जीने का इरादा कर लिया क्या? तुमने अपने ग़म से वादा कर लिया क्या? आज कल क्या बात से फिरते नहीं तुम? सच बताओ, दिल कुशादा कर लिया क्या? उर्मिला माधव 22.2.2019

डर जाते हैं

हम जो बारिश में कभी भीग के घर जाते हैं, यक़ता आँखों की चमक देख के डर जाते हैं, आईना देखें नहीं,इतनी क़सम दी खुद को, लाख़ बचते हैं मगर फिर भी उधर जाते हैं, हमने लोगों से कभी कोई भी शिकव...

करते रहे

लोग सब वाह-वाह करते रहे, हम हज़ारों गुनाह करते रहे, जैसे भी हो सका जहां भर में, इक मुहब्बत की चाह करते रहे, रोने वालों को सबने रोने दिया, अपने जीने की राह करते रहे, रोने-धोने से क्य...

लुटेरे बैठे हैं

हर सिम्त लुटेरे बैठे हैं, जागीर उजड़ने वाली है, ऐ परदानशीं अब आजाओ, तक़दीर बिगड़ने वाली है, तुम छोड़ गए हो उलझन में, मासूम मुहब्बत डरती है, इन आती जाती साँसों की, अब डोर बिछुड़न...

सनम था

जब हुस्न का आलम था,ज़ुल्फ़ों में पेच-ओ-ख़म था, दिल कूचा-ए- जानम था,सर पे न कोई ग़म था, क़दमों तले जहाँ था,बाँहों में आसमां था, परवाज़ बे-अलम थी,मेरे साथ एक सनम था, क्या दास्ताँ सुना...

कम नहीं साहिब

एक मतला तीन शेर--- ----------------------- ग़म तो हमको भी कम नहीं साहिब, वक़्त सा पर मरहम नहीं साहिब, रख के ज़ानूं पे सर को,रोया करें, इतने कमज़ोर हम नहीं साहिब, हमको मग़रूर मत कहो हरगिज़, क्यूंकि गरदन में ख़म...

नज़्म

क्यूँ मुझे बेटी की सूरत बख्श दी, दूसरों के घर को जब अपना कहा, पूछ तो लेते के दिल का क्या हुआ ? आपके खूंटे की गैय्या थी ज़रूर, पर कहो इसमें कहाँ मेरा कसूर? किसलिए मुझको किया नज़रों से...

संभल पाया नहीं

क्या किया जाता अगर ये दिल संभल पाया नहीं, रूह पर लिख्खा हुआ कुछ भी बदल पाया नहीं, टूट कर ये जिस्म और जां लडखडाते रह गए, दर्द -ए-दिल उसपे जब बाहर निकल पाया नहीं, इस किताब-ए-ज़िन्दगी क...

गीत

दुनियाँ कैसे चले मुझे देखने का चाव|| एक नदी में जितने धारे, बीच भंवर से करें इशारे, पार चले तो सुनले प्यारे, तू भी आजा साथ हमारे, दुनिया कैसे चले मुझे देखने का चाव|| जो डूबा है उसन...

फ़ैसला हो एक बार

अपने दिल को तोडना अच्छा नहीं है बारबार, दर्द की जद में हो चाहे...फैसला हो एक बार, :: हर अना को तोड़ कर इमकान मत कीजे जनाब, हर कोई है मस्त ख़ुद में,कौन किसका ग़मगुसार, :: ज़हमतें क्यों मोल ल...

ख़ुद-ब-ख़ुद

ख़ुद ही सूरत,ख़ुद-ब-ख़ुद ही आईना हूँ देख लो, ख़ुद रुबाई खुद-ब-ख़ुद हम्द-ओ-सना हूँ देख लो, पाक़-ओ-ताहिर दिल ये मेरा ग़ैर का तालिब नहीं, ख़ुद मुहब्बत ख़ुद-ब-ख़ुद ही आशना हूँ देख लो, ख़ुद-ब-खुद दीवा...

तस्वीर देखिए

अब ताज़ीरात-ए-हिन्द की तस्वीर देखिये, हर ज़ाविये से मिट रही तक़दीर देखिये, कुछ ठीकरों में बेचता इंसान अपने ख्वाब, चलती कहाँ है कोई भी तदबीर देखिये, उफ़ गर्द में निहां है यहाँ आदमी...

मकां भी चाहिए मुझको

ज़मीं भी चाहिए मुझको,मकां भी चाहिए यारब, बहुत खुशियों से वाबस्ता,जहां भी चाहिए यारब जहाँ ग़मगीन होकर कोई भी रोता न हो हरगिज़, मुझे पुरजोश दुनियां का समां भी चाहिए यारब, मगर ये या...

राहें बदलना

अब ज़रूरी हो गया राहें बदलना, ख़ुद खड़े रहना अकेले है संभलना, राह को हमवार करना ख़ुद-ब-ख़ुद ही, और ख़ुद ही वक़्त के साँचे में ढलना, भीख में क्या माँगना, कोई मुहब्बत, जिस तरह हो ख़ुद के ही प...

सौदा करूँ

किसलिए जज़्बात का सौदा करूँ, झूठ से भी कब तलक बहला करूँ, जो मेरी बुनियाद का हिस्सा नही, उसपे नीयत किस लिए ज़ाया करूँ, यूँ भी तो तनहा है हर इक आदमी, बे-सबब ही इतना क्यूँ सोचा करूँ, कौ...

निदा फ़ाज़ली खिराज़ ए अक़ीदत

कव्योदय के लिए फिल्बदीह में कही गई ग़ज़ल... मरहूम जनाब --निदा फ़ाज़ली जी को खिराज़-ए-अक़ीदत ---------------------------------------------------- :: यही बात दिल को बतानी है यारो, बहुत बे-वफ़ा जिंदगानी है यारो, ये सांसों की रफ़्तार का आ...

क्या हुआ ये

हमने तो सोचा नहीं,पर क्या हुआ ये? नफरतों का उठ रहा है...क्यूँ धुंआ ये ?? उर्मिला माधव... 16.2.2014..

बतलाए गए हैं

हम सज़ा की हद में बतलाये गए हैं , और यहाँ तक खींच कर लाये गए हैं , किस सजा के मुस्तहक हम होगये हैं, जाने क्या-क्या जुर्म बतलाये गए हैं ?? मोहमल इलज़ाम हैं हम मुत्मइन हैं, दर हकीक़त हम तो ...

दीदावर

तोड़ कर दिल सवाल करते हैं, दुनिया वाले ..कमाल करते हैं, आपकी मुश्किलों के दीदावर, रंज से .....मालामाल करते हैं, उर्मिला माधव 16.2.2017

देखा न था

वो भी शायद रहगुज़र में साथ थे, मैंने उनको पर कभी देखा न था, क्यूँ न देखा उनको मेरी आँख ने, इस क़दर मेरा चलन,ओछा न था, क्यों किसीकी ज़िन्दगी में झांकना, मेरी नज़रों में ये सब अच्छा न था, ...