लगाए रख्खा
बे-वफ़ा दोस्त को ...सीने से लगाए रख्खा,
उसने भी झूठ को हर दर्ज़ा निभाये रख्खा,
उसकी ख़ामोश सी रंजिश को हवा देते रहे,
हमने मुस्कान को होठों पै सजाये रख्खा,
हम दिखाने में कसर किसलिए रखते बोलो,
हमने हर लम्हा उसे दोस्त जताए रख्खा ,
हमको हर बात की हर बार ख़बर होती रही,
हमने हंस-हंसके हर इक राज़ छुपाये रख्खा,
उर्मिला माधव...
1.3.2015...
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