मिल जाएंगे
मेरे घर तशरीफ़ जब भी लायेंगे,
ग़म दरीचों पै रखे मिल जायेंगे,
क्या ही इस्तक़बाल होगा आपका,
जब दर-ओ-दीवार भी गिर जायेंगे,
और कहीं मलबे के नीचे ढेर में,
कुछ निशाँ नाचीज़ के मिल जायेंगे,
उर्मिला माधव...
27.2.2015...
मेरे घर तशरीफ़ जब भी लायेंगे,
ग़म दरीचों पै रखे मिल जायेंगे,
क्या ही इस्तक़बाल होगा आपका,
जब दर-ओ-दीवार भी गिर जायेंगे,
और कहीं मलबे के नीचे ढेर में,
कुछ निशाँ नाचीज़ के मिल जायेंगे,
उर्मिला माधव...
27.2.2015...
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