सफ़ीना है
अश्कों से भरी हैं ये आँखें, ज़ख़्मों से भरा ये सीना है,
बरपा है क़ह्र तक़लीफों का,आया होठों पै पसीनाहै,
हर ज़ख़्म लहू जब देता है, मजबूर नज़र चकराती है,
अब शान-ए-क़रीमी रख अपनी तूफाँ में आज सफीना है..
उर्मिला माधव...
27.2.2014
अश्कों से भरी हैं ये आँखें, ज़ख़्मों से भरा ये सीना है,
बरपा है क़ह्र तक़लीफों का,आया होठों पै पसीनाहै,
हर ज़ख़्म लहू जब देता है, मजबूर नज़र चकराती है,
अब शान-ए-क़रीमी रख अपनी तूफाँ में आज सफीना है..
उर्मिला माधव...
27.2.2014
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