याद आ रहा है
कौन मुझको याद इतना आ रहा है,
वक़्त फिर से रतजगा,दोहरा रहा है,
नींद आँखों से उड़ी जाती है मेरी,
और अँधेरा,इस क़दर,गहरा रहा है,
ये जो है सैलाब मेरे आंसुओं का,
मेरे दिल को बे-वफ़ा ठहरा रहा है,
डूबता दिल और मिरी ख़ामोश आहें,
उम्र भर उलझन भरा चेहरा रहा है,
खुशनुमां हो रौशनी खुर्शीद की प,
मेरे दिल में इक फ़क़त सहरा रहा है,
कैसे दिल का हाल कोई जान पाए,
क्योंकि दिल पर ही अजब पहरा रहा है,
उर्मिला माधव। ....
23 .2.2017
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