मकां भी चाहिए मुझको

ज़मीं भी चाहिए मुझको,मकां भी चाहिए यारब,
बहुत खुशियों से वाबस्ता,जहां भी चाहिए यारब
जहाँ ग़मगीन होकर कोई भी रोता न हो हरगिज़,
मुझे पुरजोश दुनियां का समां भी चाहिए यारब,
मगर ये याद रखना है,
किरायेदार हूँ ख़ालिस..
जहाँ मजनूँ की दुनियां हो,जहाँ लैला के किस्से हों,
जहाँ हर बात पे,हर चीज़ के कई बार हिस्से हों,
नहीं दरकार वो दुनिया जहां सब लोग रोते हों,

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