करते रहे

लोग सब वाह-वाह करते रहे,
हम हज़ारों गुनाह करते रहे,

जैसे भी हो सका जहां भर में,
इक मुहब्बत की चाह करते रहे,

रोने वालों को सबने रोने दिया,
अपने जीने की राह करते रहे,

रोने-धोने से क्या गुज़र होती,
ज़िन्दगी ख़्वाब गाह करते रहे,

सच्ची खुशियां कहाँ मयस्सर थीं,
सिर्फ़ ग़म से निबाह करते रहे, 

अपनी दुनियां बुलंद करने को,
ख़ुद से ख़ुद ही सलाह करते रहे,

तेरी दुनियां के सारे तुर्रम खां,
देख कर,आह-आह करते रहे,
उर्मिला माधव...
7.10.2015

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge