तस्वीर देखिए

अब ताज़ीरात-ए-हिन्द की तस्वीर देखिये,
हर ज़ाविये से मिट रही तक़दीर देखिये,

कुछ ठीकरों में बेचता इंसान अपने ख्वाब,
चलती कहाँ है कोई भी तदबीर देखिये,

उफ़ गर्द में निहां है यहाँ आदमी की ज़ात,
हर पाँव अब हुआ है यूँ ज़ंजीर देखिये,

रहजन हों सलातीन तो बुनियाद भी है खाक़,
लुटती हुई वतन की ये जागीर देखिये,

औक़ात अब बशर की कहाँ कोई है जनाब,
कुछ शोहदों के हाथ में शमशीर देखिये,
उर्मिला माधव...
17.2.2014...

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