बे-ख़बर

एक मतला एक शेर
पाँव मेरे हैं ज़मीं पर,आसमां पर है नज़र,
पीठ दुनिया की तरफ है,पर नहीं हूँ बे-ख़बर,

है इरादों में बुलंदी और चमक,आँखों में है,
किस तरह होगी भला परवाज़ मेरी मुख़्तसर,
उर्मिला माधव
26.2.2015..

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