सुन हवा चलते हुए जाना है सागर पार तुझको बस उसी खुश्बू में मिल जायेगा मेरा प्यार तुझको पूछना उनसे कभी कोई याद भी आता है उनको, क्या कोई दिल की छुपी रूदाद दिखलाता है उनको, और वहा...
जिस्म-ओ-जां दुश्वारियों से थक रहे हैं दम-ब-दम, सांस लेने की भी मोहलत कब मिली अहले करम ? तीर -ओ-खंजर से भी क्या डरना बता ऐ ज़िंदगी, बस यही असबाब तो अपने रहे हैं हम क़दम, हौसले कब पस्त है...
ऐसा करते हैं,रूठ जाते हैं, ज़िन्दगी भर को छूट जाते हैं... कब तलक आपको पुकारें हम, इतना थकते हैं टूट जाते हैं.. दिल को थामे हैं दोनों हाथों से, आबले फिर भी फूट जाते हैं.. दिल पे पहले ही स...
ख़ुश्क आंखों में जब नमी न रही, ज़िन्दगी फ़िर ये ज़िन्दगी न रही, जब बड़े हादसों की ज़द में रहे, ज़ब्त की फ़िर कहीं कमी न रही, हमको तनहाई ने संभाला बहुत, तीरगी तुझ से बरहमी न रही, खिड़कियां ध...
मैं अश्कबर हूँ ना कोई देखे, यूँ रुख़ पे चिलमन गिराई हमने, न कोई आहों का दर्द जाने, यूँ बात हँसके छुपाई हमने। हमें मुहब्बत थी आँधियों से, तो कैसे तूफ़ाँ से बच निकलते, कि अपने जज़्...
सड़क पर रहने वाले युवक की मनोव्यथा----- ------------------------------------------------------- अनुष्ठान जब कोई होता, मेरा मन भीतर से रोता , मेरे पास कमीज़ नहीं थी, कोई मुझे तमीज नहीं थी, कहीं अगर जो बाजे बजते , मेरे ख्वाब चौगुने स...
किसने भेजा है ये पयाम कुछ पता तो करो, क्या है इलज़ाम मेरे नाम कुछ पता तो करो, शह्र में किस तरह का शोर आज बरपा है' सबका है सब्र क्यूं तमाम कुछ पता तो करो... चार सम्तों में इक नफ़स को जगह ...
आँख है पर क्या करें बीनाई तो पायी नहीं, बात बढ़के हसरत-ए-दीदार तक आई नहीं, आँख से परदे हटाके,दिल की जानिब देखले, इस तरह गर्दन झुकानी क्यूँ तुझे आई नहीं?? तार दामन के बचाता है अबस ही ...
अगर इस क़दर दिल दुखाता रहेगा, यक़ीनन ही बस आता-जाता रहेगा, तवज्जो को जाने न जाने तगाफ़ुल, फ़क़त दीदा-ए- तर दिखाता रहेगा भटकती फ़ज़ाओं की तनहाइयों में जबीं कोई कब तक झुकाता रहेगा, अजब ख...
कब तलक कोई किसीको आज़माता ही रहे ? मोल अपनी चाहतों का क्यूँ चुकाता ही रहे ?? शख़्सियत अपनी मिटाकर बेवजह सजदे करे, क्यूँ किन्हीं क़दमों में कोई सर झुकाता ही रहे ?.... Urmila Madhav 28.4.2013
ज़िन्दगी इस तरह सम्हाली है, पिछली यादों पै ख़ाक डाली है, अपनी आहों पै इख़्तियार रखा, कुछ न कहने की क़सम खाली है, जिससे दिलने गिला किया ही नहीं, उससे फिर रूह क्यूँ सवाली है?? अपने ...
अगर इस क़दर दिल दुखाता रहेगा, यक़ीनन ही बस आता-जाता रहेगा, तवज्जो को जाने न जाने तगाफ़ुल, फ़क़त दीदा-ए- तर दिखाता रहेगा भटकती फ़ज़ाओं की तनहाइयों में जबीं कोई कब तक झुकाता रहेगा, अजब ख...
उफ़ शबे ग़म क्या बला है पूछ तो ले, कौन कब कितना जला है, पूछ तो ले, तेरे लफ़्ज़ों में हमेशा तंज़ ही क्यों, कब से दिल में ग़म पला है पूछ तो ले ख़ून छालों से रिसा ऑ चल रहा है, किस तरह इतना चला है ...
जब कहा उसने कि 'जा मर, ये सुना और दिल गया भर, नईं बचा रस्ता कोई तब, लौट के बस आ गए घर, टिक गए कोने में जाकर, बे-हया दिल,अश्क़ लेकर, हट गयी उसकी तवज्जो, अब बचा बस एक ही दर, वो ही दर जो सबका दर ...
न तू देख इतने गुरूर से,के मैं लौट जाऊँगी दूर से'' ये पयाम तेरी नज़र को है,इसे जोड़ दिल के सुरूर से.. मेरे ग़म से तू भी है पुर असर,मेरा दावा है मैं ग़लत नहीं, न यूँ ऐतकाफ़ से काम ले,आ बचाले खु...
सिंकिंग हार्ट----- डूबता दिल, जागती आंखें, बिखरी दुनियां, भीगती आंखें, आंसू से नही, घबराहट से,पसीने से, आंसू अब नहीं आते, ये अच्छी बात है, वरना घर सावन हो जाता, और फिर सब कुछ डूब जाता, ...
झूठे लफ़्ज़ों से ग़म गुसारी है, अय अमां ये भी कोई यारी है , ख़ास खुन्नस को रंग देते हो, ऐसा ये ख़ब्त कबसे तारी है? सिर्फ़ दिल से क़यास करते हो, ये कमी दम-ब-दम तुम्हारी है, इसका अहसास ही तो मु...
तेग तुम ही ने तानी है हमको अब आसानी है, तुमने ये सोचा ही कब, बिगड़ी बात बनानी है, हमने बहुत तसल्ली से, नब्ज़ तुम्हारी जानी है, इसमें कुछ भी नया नही, फ़िर-फ़िर वही कहानी है, दुनियां में ...
रेत पर मसकन बनाना है मुझे बस, अपने ख़्वाबों को सजाना है मुझे बस, तुम न बसने पाओगे इनमें कभी अब, क्यूँकि तुमसे दूर जाना है मुझे बस, मुझको न दरक़ार है कोई तवक्को, ख़ुद ब ख़ुद ही मुस...
पहले क्या-क्या न दर्द ढोते थे, ख़ूब हम दिल ही दिल में रोते थे, जाने कितनी अदाएं,देखी हैं, लोग भी क्या टशन में होते थे!! बात इतनी है अय जहां वालो, ग़लतियां सारी,हम ही बोते थे, चोट खाकर फ़...
इल्तिज़ा उसने मेरी मानी कहाँ, पर मिरे भी सब्र का सानी कहाँ, कांपती आवाज़ में रोका किये, उसने वो आवाज़ पहचानी कहाँ, सूखती है ये सरापा भीग कर, इश्क़ की बुनियाद में पानी कहाँ, मैंने उस...
इक वफ़ा के नाम पर मजबूरियां ढोते रहे, ज़िन्दग़ी के वास्ते वीरनियां बोते रहे, यूँ बज़ाहिर महफ़िलों की शिरक़तें जारी रहीं अपने हिस्से की मगर तन्हाइयां रोते रहे उर्मिला माधव
सभी ने तमाशा,किया बढ़ के हद से, सबब कुछ नहीं था यूँ ही बस हसद से, तआक़ुब किया इस क़दर जिंदगी का, बचाते फिरे ख़ुद को हम नज़रे बद से, sabhi ne tamaashe kiye badhke had se, sabab kuchh nahin tha,yun hi bas hasad se, t'aaqub kiya is qadar zindagii ka, bachaate phire,khud ko ham nazare-bad se... उर्मिला माधव... 23.4.2016 तआक़ुब---- पी...
aadhi fil badiih.... :) pyar ka haq adaa nahin hota, mujhse gar wo milaa nahin hota, yun hii aankhen,barasti rah jaatin, us se gar silsilaa nahin hotaa, shaam dhalte hi yaad aatii hai, wo bhi mujhse judaa nahin hota, usne paigaam se navazaa hai, gair ko ye pataa nahin hotaa, uski aankhon men koii jaaduu hai, warna ye dil jhuka nahin hotaa, Urmila Madhav 23.4.2016
ये तो बस अपनी पर्दा दारी है, तुमने क्या बात कब सँवारी है? हाल गैरों से मेरा पूछा किए, वाह क्या ख़ूब ग़मग़ुसारी है ! तल्ख़ लहज़े से बात करना ही, क्या मुहब्बत की आबशारी है? ऐसे शिकव...
यादें---- रात भर मेरे मुहल्ले में अजब सा शोर था, यूँ लगा जैसे किसीकी चूड़ियों पर ज़ोर था, हाथ डाले हाथ में आपस में बातें कर रहे थे, एक झूठी रस्म को अंजाम देते डर रहे थे, कल सुबह रंगीन ...
अब ज़मीं से आसमानों तक के रस्ते छोड़कर, हम चले आये हैं तुमसे सब मरासिम तोड़कर, चाह से और आह तक भी कर दिए हमने दफ़न, चल नहीं सकते हैं हरगिज़ हम जहाँ की होड़ कर, तुमने बस इतना कहा था,छुपके ...
अपनी ख़ुद्दारी के दम पर जी रहे हैं। इस लिए हम ज़ह्र लाखों पी रहे हैं। बारहा होते मुख़ातिब ज़ख्म अक्सर हम मुसलसल साथ इसके ही रहे हैं। ये अनादारी है आदत के मुताबिक हम न ज़ाती रंग मे...
A poem by Madhuvan Rishiraj छोड़ कर मुझको यहाँ हो गए हाफ़िज़ निहाँ मैं बेअमाँ... मैं बेअमाँ... उनके गए... मैं बेअमाँ सब ख़ाक है उनके बिना अब वो कहाँ और मैं कहाँ कोई नहीं मेरा पासबाँ हैं हर तरफ़ खंजर सिना ...
तू जो दोस्त ही है अगर मेरा, तो समझ तो मुझको ज़रा ज़रा, वो जो ज़ख़्म मेरा भरा नहीं, किया फिर से तूने हरा हरा, मेरा ग़म से सीना फ़िग़ार है रहे दिल भी सबसे डरा डरा, इसे तू ही कह क्या ये ठीक है? ह...
एक मतला दो शेर----- हुए हज़ारों टुकड़े दिल के,और क़ह्र से क्या होता है?? हम मानिंन्द हुए मुर्दे के,और ज़ह्र से क्या होता है?? जिसकी हो जागीर हमेशा रहे उसी की मरते दम तक, कोई इस्तक़बाल कहे ब...
ख़ूब रु था रु-ब=रु, जाने क्या थी गुफ़्तगू, क्यूँ अजब सा है असर, मिट गई हर आरज़ू, ख्वाब हो या हो ख़याल, अ ब नहीं कोई जुस्तजू आँख ने चाहा जिसे, हर घड़ी और कू-ब-कू, ज़िद हमारी सुन ज़रा , माहवश ऐ मा...
कड़े फिकरे कोई कह कर, चला जाता था जो अक्सर, तग़ाफ़ुल उसकी नज़रों में, कभी देखा था जो मैंने, वो मुझको याद आता है।। ज़मीं जब ज़ख़्म धोती थी, फ़लक़ रह-रह के रोता था , कहीं तन्हाई में जाकर, कोई दा...
सुकून-ए-दिल के लिए ज़िन्दगी तरसती रही, मगर ये सांप सी दुनियां के सिर्फ़ डसती रही, हमारी रूह ने देखा तो ख़्वाब शीरीं था, अजब अज़ाब रहा, ज़िन्दगी झुलसती रही, बड़े ही शौक़ से पहुंचे थे, बर्...
ज़ख़्म ताज़ा ही है, भरा तो नहीं, हादसा ये भी कुछ नया तो नहीं। दिल को आदत है, याद रखने की, आपसे फिर भी कुछ कहा तो नहीं। चश्म-ए-गिरयां ने आंख धो डाली, क्या हुआ इसमें कुछ गया तो नहीं। जो भी ...
सियासत के नाम--- ------------------------- कितनी छोटी उम्र में बहका रहे हैं, लोग बच्चों की जवानी खा रहे हैं, कौन कितनी दूर तक माहिर हुआ है, दूसरा पहलू फ़क़त दिखला रहे हैं.. कुर्सियों पै बैठकर ऊंचाइयों स...
याद उनकी सताती रही रात भर, नींद आँखें चुराती रही रात भर, रूह बेचैन होकर भटकती रही, बेबसी दिल दुखाती रही रात भर, एक खुशबू का झोंका मुसलसल रहा, रात रानी रुलाती रही रात भर, #उर्मिला...
तरही ग़ज़ल ------------- एक चिलमन सरकती रही रात भर, आँख रह-रह के तकती रही रात भर, रात रानी की खुशबू में डूबा जिगर, सांस जिससे महकती रही रात भर, एक अन्देशा सताता रहा बस मुझे, ये पलक जो फड़कती रही ...
आज कल वो होगए हैं संग दिल, आदतन यूँ भी हैं वो कुछ तंग दिल, हम रक़ाबी में सजा कर ले गए , कितना सुंदर ख़ुशनुमाँ नौरंग दिल, इससे बढ़ कर बेरुख़ी होती भी क्या बा-अदब लौटा दिया बैरंग दिल...
अच्छे शब्दों का संयोजन, परिचय देता है चरित्र का, ओछे शब्दों के प्रयोग से, होता है अपमान मित्र का, वाणी है संस्कृति सभ्यता, दर्पण देश के मान चित्र का, उर्मिला माधव... 19.4.2016
बुतख़ानों के शह्र में ज़िंदा घूम रही हूँ, बिलकुल तनहा हूँ शर्मिंदा घूम रही हूँ, सोच रही हूँ उंगली से सब छूकर देखूं, हो सकता है कुछ आइन्दा घूम रही हूँ.... उर्मिला माधव... 19.4.2018...
ख़ुश्क आंखों में ......नमी पैदा हुई है, एक चाहत आज तक भी छुइ-मुई है, एक मेरा ऐजाज़ था जो तू न समझा, अब तलक भी देख ....पर्दा-ए-दुई है, उर्मिला माधव, 18.4.2017
क्या समझूँ तुम्हें, एक डगमगाया हुआ वजूद? या एक क़ैदी ? बे-बुनियाद दायरों में महदूद, या बंधे हुए आसमान में उड़ने वाला पंछी, या बिना नाथ का बैल ? जिसकी नकेल, हरकारे के हाथों में, सिर्...
बे-पनह हुस्न का सबब क्या है, किसको मालूम है के कब क्या है, इससे पहले भी कुछ रहा होगा, तू मगर देख ले के अब क्या है? साथ कौड़ी भी इक नहीं जानी, अब बता वो तेरा अरब क्या है? उर्मिला माधव
One day we all will ......... depart on a journey free of cost Dont worry about seat reservation ,its confirmed & Flight is always on time Our good deeds will be our Luggage Humanity will be our Passport Love will be our Visa Make sure we do our best to travel to Heaven!!!!
उसको सबसे जुदा समझते थे, सच ये है..नाख़ुदा समझते थे, उसको दर्ज़ा दिया मशाइख का, खुद को अदना ग़दा समझते थे, जिसमें था इन्तेहा का रंग रचा, उसको हम इब्तेदा समझते थे, दिल को ये रायगाँ यक़...
लगती रही है साथ सी पर साथ नहीं है, इस ज़िंदगी की कोई भी औक़ात नहीं है, ये मौत का वक़ार है लो देख लो मियाँ, ख़ाली हैं दोनों हाथ, कोई बात नहीं है, दूल्हा हो या दुल्हन हो नहीं फ़र्क़ है कोई, अन...
एक आवाज़.... मैले कुचैले कपडे आँखों की इस नमी पर, ख़ाके उतारते हैं काग़ज़ की एक ज़मीं पर, तकलीफ को हमारी,मौज़ू बना बना कर, उंगली चुभा रहे हैं,हालात की कमी पर, कैसे बताएं इनको,इनकी तरह हैं ...
दुनियाँ से कुछ मिला भी नहीं...आपकी क़सम, और हमको कुछ गिला भी नहीं,आपकी क़सम, हम उम्र भर निभाया किये...मुश्किलों के साथ, और इसका कुछ सिला भी नहीं,आपकी क़सम, किस दरज़ा हम जगाते रहे.....कम नसी...
अपनी दुनियां है बिलकुल जुदा दोस्तो इसलिए अब चलो .....अलविदा दोस्तो.... लोग जितने भी दुनियां में मिलते हैं सब, आदमी हैं ,......नहीं कोई ख़ुदा दोस्तो... ज़िन्दगी भी ..कोई मिलकियत तो नहीं, रंग इ...
आओ क्या मेरी तरहा तुम भी रहोगे? मेरा वीराना कभी तुम भी सहोगे? अब मिरी तनहाइयों का ये है आलम, किस तरह जीती हूं ये तुम भी कहोगे, मेरी आंखों में समंदर है पता है ? बह अगर निकला तो फिर त...