मुझे बस
रेत पर मसकन बनाना है मुझे बस,
अपने ख़्वाबों को सजाना है मुझे बस,
तुम न बसने पाओगे इनमें कभी अब,
क्यूँकि तुमसे दूर जाना है मुझे बस,
मुझको न दरक़ार है कोई तवक्को,
ख़ुद ब ख़ुद ही मुस्कुराना है मुझे बस,
हाँ मैं तनहा हूँ मगर ग़ाफ़िल नहीं हूँ,
हौसले से चलते जाना है मुझे बस,
नईं मलक अब खाए हरग़िज़,देखना है,
बा ख़ुदा ख़िरमन बचाना है मुझे बस,
अब उठे तूफ़ान दिल में चाहे जितना,
दिल को ही मदफ़न बनाना है मुझे बस,
#उर्मिलामाधव ....
24.4.2015...
Comments
Post a Comment