रहोगे
आओ क्या मेरी तरहा तुम भी रहोगे?
मेरा वीराना कभी तुम भी सहोगे?
अब मिरी तनहाइयों का ये है आलम,
किस तरह जीती हूं ये तुम भी कहोगे,
मेरी आंखों में समंदर है पता है ?
बह अगर निकला तो फिर तुम भी बहोगे ?
क्या ख़बर थी जिंदगी घबराएगी तब,
साथ मेरे उस घड़ी तुम भी न होगे,
मैं तो इक गिरती हुई दीवार सी हूं,
जब कभी ढह जाउंगी तुम भी ढहोगे?
उर्मिला माधव
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