संग दिल

आज कल वो होगए हैं संग दिल,
आदतन यूँ भी हैं वो कुछ तंग दिल,

हम रक़ाबी में सजा कर ले गए ,
कितना सुंदर ख़ुशनुमाँ नौरंग दिल,

इससे बढ़ कर बेरुख़ी होती भी क्या
बा-अदब लौटा दिया बैरंग दिल,

लौट कर उस दर पै अब न जायेंगे,
खुद ही खुद से कर रहा है जंग दिल,

इस क़दर ये आज मैला हो गया,
क्या दिखाएँ उनको ये बदरंग दिल....
उर्मिला माधव..
19.4.2015...

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