यारी है
झूठे लफ़्ज़ों से ग़म गुसारी है,
अय अमां ये भी कोई यारी है ,
ख़ास खुन्नस को रंग देते हो,
ऐसा ये ख़ब्त कबसे तारी है?
सिर्फ़ दिल से क़यास करते हो,
ये कमी दम-ब-दम तुम्हारी है,
इसका अहसास ही तो मुश्किल है,
कौन पलड़ा कहाँ पै भारी है,
हमको जीने दो जैसे जीते हैं,
अय मियाँ ज़िन्दगी हमारी है,
#उर्मिलामाधव ...
25.4.2016...
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