ज़ख्म की बेल फिर से हरी होगई, जिन्दगी दर्द से....अधमरी होगई, इतना ज़्यादा जलाया गया है मुझे, कि मैं कुंदन सी तपके खरी होगई, मेरी शफ्फाक़ रूह और उजला बदन, कैसी पत्थर हुयी......मरमरी होगई, न...
आज भी उसकी चिता से एक धुआँ उठता सा है, उफ़ मुसलसल मेरे भीतर कुछ कहीं घुटता सा है, चाक़ सा दामन लिए अब कौन जीना चाहता है , रूह में एक आग है, दिल दर्द से कुटता सा है, सब बिखरता सा लगे,दि...
दुनियाँ के सारे मेले, लगते हैं बस झमेले, सबको धता बताकर, चलते हैं अब अकेले, तर्जीह उसको क्या दें, जो ज़िन्दगी से खेले, गाहे-ब-गाहे आकर, तकलीफ में धकेले, सुख चैन तक हमारा, गमख्वार ब...
बात तो बिलकुल शराफ़त से कही थी, क्या ख़बर के क्या कमी उसमें रही थी, बाज़ आख़िर आ न पाया.....दोस्त मेरा, क्या ग़ज़ब है.....क्यूँ हवा झूठी बही थी, आग पत्थर में......कभी लगती नहीं है, कैसे बदलेगी..जो फ...
हक़ीक़त हमें अब बतानी पड़ेगी, तुम्हें ग़म से बाज़ी लगानी पड़ेगी, तुम्हें याद होगा, कभी हम मिले थे, वही बात तुमको भुलानी पड़ेगी, कहाँ तक तअक़्क़ुब में फिरते रहेंगे ज़माने से तबियत हटानी...
फिल्बदीह के तह्तकही गई एक ग़ज़ल... जब अँधेरे थे ,वो पराया था, रौशनी देख के जो आया था, उसको दरकार सिर्फ़ खुशियाँ थीं मैंने तकलीफ़ में बुलाया था, मेरी उम्मीद खुद पे कायम थी, इससे बेहतर ...
उसकी गलियों की बात आई-गई, खाक़ इस दिल की फिर उड़ाई गई.. कितनी शर्मिंदगी से गुज़रा किये, उसकी तसवीर साथ पाई गई, इक अजब शक़्ल से मुखातिब थे, आईना दे के जो दिखाई गई, मैं हूँ क़िरदार उस कहान...
वो नज़र आये ज़रा सा और कलेजा हिल गया, क्या अजब जलवागरी थी लो हमारा दिल गया.... वो ही वो यकता जहां में,कोई भी सानी नहीं दफ़अतन ही आगये,लेकिन इशारा मिल गया !! उर्मिला माधव .... 27.11.2014
वो जा चुके हैं बज़्म से,इज्ज़त उछाल कर, मैंने भी रख दिया है अभी गम संभाल कर, ख़ुद ही जवाब दूं ये कहाँ फिक्र है मुझे, हालात सच को लायेंगे बाहर निकाल कर, काँटों पे लिख रही हूँ अभी आबलों ...
सड़क पर रहने वाले युवक की मनोव्यथा----- ------------------------------------------------------- अनुष्ठान जब कोई होता, मेरा मन भीतर से रोता , मेरे पास कमीज़ नहीं थी, कोई मुझे तमीज नहीं थी, कहीं अगर जो बाजे बजते , मेरे ख्वाब चौगुने स...
वो जा चुके हैं बज़्म से,इज्ज़त उछाल कर, मैंने भी रख दिया है अभी गम संभाल कर, ख़ुद ही जवाब दूं ये कहाँ फिक्र है मुझे, हालात सच को लायेंगे बाहर निकाल कर, काँटों पे लिख रही हूँ अभी आबलों ...
दिल भला किसलिए सवाली है, शाम जब रोज़ ढलने वाली है , चाँद भी अब नज़र नहीं आता, जिस्म तनहा है रात काली है, दिन के आने से कुछ नहीं होगा रंग सूरज का भी जलाली है, आँख कैसे सुकून पाए अब, ज़र्र...
इसी दुनियां मेँ मैंने कुछ,ग़ज़ब किरदार देखे हैं, नहीं किस्सा ये एक दिन का,हज़ारों बार देखे हैं, बहुत हैरत हुई उक्दा अचानक खुल के जो आया, लब-ओ-लहजा बदलते जब ....पुराने यार देखे हैं.... उर...
कल तुम्हारी याद आई,रात भर सोई नहीं, अश्क़ अपना रो रहे थे,मैं मगर रोई नहीं, क्या कहूँ दामन न जाने कैसे गीला हो गया, होश कायम रह गए बस मुख़्तसर खोई नहीं.. उर्मिला माधव.. 24.11.2016
कल तुम्हारी याद आई,रात भर सोई नहीं, अश्क़ अपना रो रहे थे,मैं मगर रोई नहीं, क्या कहूँ दामन न जाने कैसे गीला हो गया, होश कायम रह गए बस मुख़्तसर खोई नहीं.. उर्मिला माधव.. 24.11.2016
हम ज़मीं खोद के देखेंगे,कहाँ पहुंचा खदंग, उसने माहौल में .कुछ खाक़ उड़ा रख्खी है .... एक मदारी जो बजाता है,डुगडुगी अपनी, उसने तरक़ीब से बस भीड़ जुटा रख्खी है, उर्मिला माधव... 24.11.2016
Ranjishon ki dhhar par kitni nishaani mit gayin, saltanat kitni mitin ,kitni riaaya mit gayin kin darakhton ki na jaane kitni shaakhen mit gayin, sabz patte mit gaye or naujawani mit gayi, mit gaye kitne sikandar or miti raah-e-junoon mit gaye hukkam hakim bas kahani rah gayi..... ------------------------------------------------------------------ रंजिशों की धार पर,कितनी निशानी मिट गईं, सल्तनत कितनी मिटीं,कितनी रिआया मिट गईं, किन दरख़्तों की न जाने,कितनी शाख...
आपसे जब ये मुकाबिल हो गई, जिंदगानी और मुश्किल हो गई, aapse jab ye muqabil ho gaii, zindgaani or mushkil ho gaii, चुपके-चुपके रोना,कहना कुछ नहीं, एक नई ख़ूबी ये हासिल हो गई, chupke-chupke rona,kahna kuchh nahin, ek naii khoobii ye haasil ho gaii, किस तरह तय होंगी इतनी दूरियां, चलते-चलते र...
मेरी एक बहुत पसंदीदा रचना... सखियाँ कहतीं,साजन के बिन प्यार अधूरा लगता है, अम्मां कहतीं काजल बिन....सिंगार अधूरा लगता है, चाहे जितनी बिजली चमके,घर की सभी मुंडेरों पर, बिन बरखा के ...
समझ आया तो येआया, मुहब्बत एक मुश्किल है नहीं होजाए तो मुश्किल, कहीं होजाए तो मुश्किल, निकल तो आये हैं घर से, कि हम करलें..मुलाकातें, कहीं हो जाए तो मुश्किल, नहीं हो जाए तो मुश्कि...
पहाड़ों की साँसों की.........रफ़्तार कहना, तो बतलायेंगे हम......नदी का भी बहना, ये सूरज निकलना......हवाओं का चलना, दरख्तों पे शाखों का.......लहरा के हिलना, ये झरनों के पानी का........नीचे फिसलना, कि नदिया ...
वो मुझे झूठा हँसाना चाहता था, मैंने समझा ग़म मिटाना चाहता था, Wo mujhe jhutha hansanaa chahta tha, Maine samjha gham mitana chahta tha, अश्क़ तो पोंछे न अपनी उँगलियों से हाँ मगर उंगली उठाना चाहता था, Ashq to pichhe n apni ungliyon se, Haan magar ungli uthana chahta tha, तंग दिल ख़ुद दे न पाया प्या...
खुद आईने के आगे ज़रा पड़के देखिये, चेहरा किताब है तो ज़रा पढ़के देखिये, गैरों पे हंस रहे हैं मियाँ बे-वज्ह ही आप , ख़ुद की भी फितरतों से ज़रा लड़के देखिये, ख़ुरशीद के तले जो जली दूर है वो द...
दिल तो शर्माता है फिर भी,तुम कहो तो प्यार लिख दूँ, और तुम्हारे दिल के आगे,अपने दिल की हार लिख दूँ ? प्यार के इन दायरों में बंध के रहना है तो मुश्किल, पर किसी दीवार के कोने में इक इज़...
बहुत दूर कहीं एक कुत्ते के कराहने की आवाज़, बहुत वीराना सा लगता है, दहशत सी लगती है, सूखे पत्तों की आहट, जैसे कोई अँधेरे में चलता हो, ज़िन्दगियों का जायज़ा लेने निकलता हो, वहशत होत...
ग़म ही ग़म तो अपने दिल में हमने पाले हैं बहोत, क्योंकि सब खुशियों के दर पे यूँ भी ताले हैं बहोत, क्यों रखें हम राबिता,दुनियां के झूठे रंग से, जिसने चाहा उसने हम में ख़म निकाले हैं ब...
हम सज़ा की हद में बतलाये गए, और यहाँ तक खींच कर लाये गए, किस सजा के मुस्तहक हम होगये, जाने क्या-क्या जुर्म बतलाये गए , मोहमल इलज़ाम हैं हम मुत्मइन हैं, दर हकीक़त हम तो झुठलाये गए, उफ़ प...
धुंआ,क्रेमेटोरियम से उठता हुआ, बहुत शोर आग की लपटों का, शादी,बगल के घर में, यानि ख़ाना आबादी, बहुत शादमा हर कोई बजते हुए ढोल ताशे, नाचते हुए लोग, सच क्या है,दोनों में से? क्या श्मश...
ज़ख़्म सींना मेरा नसीब है क्या ? तेरी दुनियां कोई सलीब है क्या? मेरी आवाज़ जब लरजती है पूछते हैं कोई अदीब है क्या? सांस क्यों ज़िन्दगी पे भारी है, ज़िन्दगी मौत के क़रीब है क्या? तूने त...
एक मतला दो शेर--- -------------------- बे-वज्ह इस ज़ीस्त पर क्यूँ हर क़रम करते हैं हम !! मरके जीने के इलावा........और क्या करते हैं हम ?? चश्म-ए-गिरियाँ,टूटते दिल,और फ़क़त,तन्हाइयां, दर्द पीने के इलावा..........और क्या ...
ये दिल ढूँढता है जगहा अजनबी सी, हवा अजनबी सी ,फ़ज़ा अजनबी सी, ---------------------------------------------- ye dil dhundhta hai jaghaa ajnabii sii, hawaa ajnabii sii fazaa ajnabii sii :: :: कभी ज़िंदगी में ये दिन भी दिखाना, के हर सम्त इक अजनबी रंग लाना, ज़मीं अजनबी,आसमां अजनबी हो, कोई शख...
ज़ख़्म सिलना मेरा नसीब है क्या ? तेरी दुनियां कोई सलीब है क्या? मेरी आवाज़ जब लरजती है पूछते हैं कोई अदीब है क्या? सांस क्यों ज़िन्दगी पे भारी है, ज़िन्दगी मौत के क़रीब है क्या? तूने त...
मौत की जब मेजबानी होगई, ज़िन्दगी की तर्जुमानी होगई, जो हकीक़त थी अभी तक रु-ब-रु, टुक पलक झपकी कहानी होगई, सांस जब तक थी तभी तक गुफ्तगू, दफअतन ही बे-जुबानी होगई, क्यूँ ये दुनिया रोज़ ...
बहुत ग़मज़दा थे जुदा उनसे होके, गुज़रती थी हर इब्तेदा उनसे होके, मेरा इश्क़ था इन्तेहाई मुक़द्दस, नहीं रह सका अलविदा उनसे होके, बड़ी मिन्नतों से जिसे मैंने भेजा लो रूठा सा निकला ख़ु...
मेरे साकी शोखिये रिन्दाना आकर देख ना, बे-अदब हाथों में है पैमाना,आकर देख ना,.... रंग-ए-महफिल देखने के वास्ते ही आ ज़रा, हर सलीकेमंद का चिल्लाना,आकर देख ना, हर कोई मैकश का जामा ओढ़ कर झ...
एक तसल्ली के सिवा मजबूर दिल करता भी क्या? मर तो पहले ही चुका था,और फिर मरता भी क्या? ek tasallii ke sivaa ,majboor dil karta bhi kya, mar to pahle hi chuka tha or phir marta bhi kya, दर्द लेकर दर-ब-दर,फिरते रहे जब उम्र भर, आख़री लम्हों में आख़िर ज़ख्म ये भरता भी क...
एक यही बात तो रह-रहके दिल में आती है, नेज़े ही नेज़े हैं और एक मेरी छाती है, मेरी मजलूम सी ख्वाहिश का वली कोई नहीं, दिल के कहने को हर इक बात रही जाती है, यूँ भी सोचा के हवा से ही शुरू कर...
कोई हीलः न किया,कुछ भी तमाशा न किया, मैंने बस इतना किया हश्र का जलवा न किया, तेरी बातों की अदा मुझको धमक देती रही, मैंने बस इतना किया गैर से चर्चा न किया... तूने दुश्मन की तरह पूरे ...
चमत्कार को नमस्कार है,कुर्सी वाले बाबूजी राव रंग सब निर्विकार है,कुर्सी वाले बाबूजी रंजू वंजू रीता गीता रोज नाचतीं आँगन में मद्यपान है और बहार है,कुर्सी वाले बाबूजी राग ...
एक नज़्म आप सभी दोस्तों की नज्र.... तकलीफ दी सभी ने.... बस ढंग मुख्तलिफ़ थे, ------------------------ कभी बज़्म में बुलाकर, कभी बज़्म से हटा कर... कभी आसमां दिखा कर, कभी मुंह के बल गिरा कर, कभी दिल से दिल मिला कर, क...
जब दर्द से मुक़ाबिल होते हैं हम बहुत, सब लोग सोचते हैं,रोते हैं हम बहुत, अपना चलन हमेशा कुछ ख़ास ही रहा है, महफ़िल के बीच हंसकर,खोते हैं हम बहुत, साँसें जो मिल गई हैं,पूरी तो करनी हों...
एक इशारा उस जहां से आ रहा है, आदमी जिस सम्त से बचता रहा है, खोल सांसों पर चढ़ाना ग़ैर मुमकिन, है वही जो अब तलक होता रहा है, पर लकीरों के फ़क़ीरों की ये दुनियां, तोड़ने वाला बहुत हंसता र...
:) :) :) मीर,ग़ालिब,दाग़,मोमिन,चार बैठे थे जहाँ, क्या बताएं,हम हक़ीरों ने भी कीं गुस्ताखियाँ, भूल से इक लफ्ज़ भी पाई न उनसे दाद कुछ, बस करम इतना रहा के,सबकी खींचीं खुश्कियां.. #उर्मिलामाधव.....
Guftgu ka silsila hii tod dun kya ? Har kisise raabita hi chhod dun kya? Ye hawayen raas to aati nahin, Apne hathon rukh hawa ka mod dun kya? Urmila Madhav... 13.11.12
कोई अंजुमन सजाके ज़रा अपना दिल लगालूं?? तुम भी सलाह देना किस-किस को मैं बुलालूं?? लबरेज़ है मुसलसल पुरनम हुआ कलेजा, शबनम से भीगे मोती पलकों पे मैं सजा लूं?? सुनसान सा उफ़क़ है बिलकुल ...