ग़ज़ल
वो जा चुके हैं बज़्म से,इज्ज़त उछाल कर,
मैंने भी रख दिया है अभी गम संभाल कर,
ख़ुद ही जवाब दूं ये कहाँ फिक्र है मुझे,
हालात सच को लायेंगे बाहर निकाल कर,
काँटों पे लिख रही हूँ अभी आबलों के नाम,
ख़ामोश मेरे दिल, न अभी कुछ सवाल कर,
इस दर्द से निजात भी मिलनी तो है ज़रूर
हो उम्र भर को मुंतज़िर,क़ायम मिसाल कर,
कारीगरी अजब है मगर वक़्त की जनाब,
कितनों को इसने पी लिया शीशे में ढाल कर,
#उर्मिलामाधव....
26.11.2015
Comments
Post a Comment