ग़ज़ल
चमत्कार को नमस्कार है,कुर्सी वाले बाबूजी
राव रंग सब निर्विकार है,कुर्सी वाले बाबूजी
रंजू वंजू रीता गीता रोज नाचतीं आँगन में
मद्यपान है और बहार है,कुर्सी वाले बाबूजी
राग भैरवी गाएंगे तो सुबह शाम से क्या लेना
अपने हाथों सुर बहार है,कुर्सी वाले बाबूजी...
सदियों से जो होता आया.इतिहासी सैलाबों में,
वो ही किस्सा बार-बार है,कुर्सी वाले बाबूजी,
प्रजातंत्र है,इसके मानी मालुम है ना तुमको भी ?
किसको क्या-क्या इख़्तियार है,कुर्सी वाले बाबूजी
#उर्मिलामाधव...
15.11.2015...
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