दिल लगालूँ
कोई अंजुमन सजाके ज़रा अपना दिल लगालूं??
तुम भी सलाह देना किस-किस को मैं बुलालूं??
लबरेज़ है मुसलसल पुरनम हुआ कलेजा,
शबनम से भीगे मोती पलकों पे मैं सजा लूं??
सुनसान सा उफ़क़ है बिलकुल सियाह रातें,
ग़र तुम बुरा न मानो चन्दा को मुंह लगालूँ ??
कुछ दाग़ मेरे दिलके कुछ दिलजली वो बातें
ज़ख्मों से बहते खूँ से दरिया सा एक बनालूँ??
कासिद भी लौट आया दर पर तुम्हारे जाकर
घर की दिवार पर ही क्या अपना सर टिका लूँ??
उर्मिला माधव...
11.11.2014...
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