ग़ज़ल
दिल तो शर्माता है फिर भी,तुम कहो तो प्यार लिख दूँ,
और तुम्हारे दिल के आगे,अपने दिल की हार लिख दूँ ?
प्यार के इन दायरों में बंध के रहना है तो मुश्किल,
पर किसी दीवार के कोने में इक इज़हार लिख दूँ,
दिल ये कहता है,............तुम्हीं मख़सूस हो मेरे लिए,
सोचती हूँ दिल ही दिल में,तुमको मैं "दिलदार" लिख दूँ....
ज़िन्दगी तो हर क़दम ........दुश्वारियों का नाम है
बस इन्हीं दुश्वारियों में,इश्क़ का किरदार लिख दूँ
उर्मिला माधव....
21.11.2016
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