असर ही नहीं
दिल किसी ग़म से पुर असर ही नहीं,
दुनियां वालों का हमको डर ही नहीं,
पहरा देते हैं अब ये शम्स-ओ-क़मर,
इस ज़माने को ये ख़बर ही नहीं,
सब के सब पर भी काट सकते थे,
बेबसी उन की हमको पर ही नहीं,
अपने लहजे में है कसैला पन,
कहने सुनने को कुछ कसर ही नहीं
किसकी जुर्रत है इसको तड़पा दे,
इतना कमज़ोर दिल का घर ही नहीं,
उर्मिला माधव
16.12.2017
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