मिला करके देख
नज़र को नज़र से मिला करके देख, कभी ख़ुद को यां तक भी ला करके देख कभी मेरे दिल को हिला करके देख, बनाया मुझे जिसने तबियत से ख़ूबाँ, मेरे कूज़ागर से गिला कर के देख, सबाब-ए-मुहब्बत तवारीख होगी, किसी मर्ग-ए-दिल को जिला कर के देख, तुझे राहतों की भी नेमत मिलेगी कोई चाक दामन सिला करके देख, तेरी ज़िन्दगी को ही तस्कीन होगी, कभी हक किसीका दिला करके देख.... उर्मिला माधव... 31.10.2016