हम चले ही तो नहीं बहते हुए पानी की तरफ़,
उम्र भर देखा किए बस ज़िन्दगानी की तरफ़,

टूट कर तनहाईयों से बात करते रह गए,
हमने उम्मीदें रखीं जब इक निशानी की तरफ़,

हमने दीवानों को देखा जा ब जा भटके हुए
किस तरह बढ़ते गए तश्ना दहानी की तरफ़ 

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