अजब मिज़ाज है अपना

अजब मिज़ाज है अपना मगर ये चाहेंगे,
गुज़रता कुछ भी रहे, तुमसे हम निबाहेंगे,

समझ सकोगे मगर उफ़ न बोल पाओगे
तुम्हारे ग़म में कभी इस क़दर कराहेंगे,

ज़माना चाहे कहे कुछ भी उसकी मर्ज़ी है
अगरचे हम ही रहे हम,  महज़ सराहेंगे
उर्मिला माधव

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