कमाल करते हो
यार तुम तो कमाल करते हो,
इश्क़ पे आंखें लाल करते हो?
आंखें हंसते हुए ही जंचती हैं,
इन में आंसू बहाल करते हो ?
कहते फिरते थे,जान हाज़िर है,
अब नहीं नज़्र-ए-हाल करते हो?
झूठ कहने की ताब इतनी है ?
शान-ए-सच को ज़वाल करते हो?
इतने आसान हम कभी भी न थे,
आज फ़िर क्या सवाल करते हो?
डींग हांको, मगर ये होश रहे,
सब्र किसका हलाल करते हो...
उर्मिला माधव
17.10.2018
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